on the pretext of closing India! https://www.indonepalnews.in Tue, 11 Sep 2018 01:36:26 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://www.indonepalnews.in/wp-content/uploads/2018/12/cropped-rsz_indo-nepal-news-logo-32x32.png on the pretext of closing India! https://www.indonepalnews.in 32 32 भारत बंद के बहाने सोनिया गांधी ने राहुल को बना दिया गठबंधन का नेता! https://www.indonepalnews.in/sonia-gandhi-made-rahul-the-leader-of-the-alliance-on-the-pretext-of-closing-india/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf/ Tue, 11 Sep 2018 01:33:50 +0000 http://www.indonepalnews.com/?p=25378 इंडो नेपाल न्यूज नेशनल डेस्कः पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने आज मोदी सरकार के खिलाफ संयुक्त विपक्ष का भारत बंद बुलाया था। बेशक यह भारत बंद कांग्रेस ने बुलाया, लेकिन विपक्ष के तमाम बड़े नेता मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे। थोड़ी देर बाद यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी की मंच पर एंट्री हुई, लेकिन उन्होंने मंच से न तो कोई भाषण दिया और न ही वहां पर ज्यादा देर रुकीं।

In

In news

भारत बंद की शुरूआत से पहले वरिष्ठता के क्रम को देखते हुए सबसे आखिर में शरद पवार को भाषण देने के लिए बुलाया गया। उसके ठीक बाद राहुल गांधी ने भाषण दिया। कांग्रेस की ओर से यह दिखाने की कोशिश की गई कि गठबंधन का सबसे बड़ा नेता बाद में बोलता है और इस गठबंधन का चेहरा राहुल गांधी ही हैं। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी कुछ देर तक विपक्ष के नेताओं के बीच बैठीं जरूर, लेकिन सबकुछ ठीक-ठाक देख मंच की जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंप वह घर चलीं गईं।

In news

भारत बंद में शिरकत करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी मानसरोवर यात्रा खत्म कर दिल्ली लौटे और तुरंत राजघाट का रुख किया। उनकी पार्टी के दिग्गज नेता पहले से ही राजघाट पर मौजूद थे और साथ ही विपक्ष के नेता भी जुटे थे। राहुल ने कैलाश मानसरोवर से लाया जल महात्मा गांधी की समाधि पर चढ़ाया। उसके बाद वो विपक्ष के नेताओं के साथ पैदल ही रामलीला मैदान के पास स्थित पेट्रोल पंप पर धरना देने के लिए चल पड़े। राहुल गांधी जब राजघाट से पैदल चले थे तो सबकी नजरें इस पर टिकीं थी कि उनके साथ विपक्ष के कितने दल शामिल हैं।

In news

बता दें कि सोनिया गांधी अध्यक्ष पद से रिटायर होने के बाद राजनीति में उस कदर सक्रिय नहीं हैं, ऐसे में वो देर-सबेर राहुल गांधी को ही सबकुछ सौंप देंगी। ये कयास तो पहले से ही लगाए जा रहे थे। सोनिया ने अध्यक्ष पद की कुर्सी पिछले साल दिसंबर में राहुल को सौंप दी थी। लेकिन अब विपक्ष के साथ तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी जिस तरह उन्होंने राहुल के हवाले की है। इससे सोनिया गांधी के रिटायरमेंट के कयास भी लगने लगे हैं।


]]>