सोनौली और संपतिहा के बीच चतुर नौतनवा पुलिस
सोनौली और संपतिहा के बीच चतुर नौतनवा पुलिस
– क्या सचमुच बेदाग छवि की है नौतनवा पुलिस?
आईएनन्यूज, नौतनवा (धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट)
पुलिस के दामन पर आरोपों के छींटे पड़ना कोई नयी बात नहीं है। सोनौली पुलिस महकमें में आये दिन लाइनहाजिर और सस्पेंड़ होना एक आमबात हो गयी हैं। चलिये मान लेतें हैं की कुछ़ पुलिसकर्मियों को सोनौली सीमा की मारीचिका ने अपने आगोश में ले लिया और वे बहक गये, दागदार हो गये। मगर तीन दिन पहले संपतिहा चौकी के कई पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के आरोप की गाज गिरने के वाकये ने नौतनवा की पुलिसिंग की तरफ ध्यान देने जैसी बात उत्पन्न कर दी। सवाल भी पैदा कर दिया कि इतनी हलचलों के बाद भी नौतनवा पुलिस भ्रष्टाचार मुक्त रही। यह असलियत है? या फिर नौतनवा पुलिस की चतुराई? सोंचने का मुद्दा है।
नौतनवा इंस्पेक्टर श्रीधर पाठक के खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवमानना करने के आरोप में गैर जमानती वारंट आना, भ्रष्टाचार का मामला नहीं अपितु लापरवाही कही जा सकती है। यानी की नौतनवा पुलिस सोनौली या संपतिहा पुलिस की तरह कुछ़ ऐसा नहीं करती जो गलत व भ्रष्ट टाईप की हो। ,,,,यह बात हजम करने लायक है? यदि नहीं तो यह कहना गलत न होगा कि सोनौली और संपतिहा पुलिस के बीच रहने वाली नौतनवा पुलिस चतुर है। ईमानदार है।
नौतनवा पुलिस मालवाहक ट्रकों से वसूली नहीं करती। यहां चौकी या थाना के वसूली करने वाले कोई कार्यखास नहीं हैं। कस्बे में नेपाली शराब व स्मैक की बिक्री नहीं होती है। सुलह-समझौते और तहरीर के जांच के नाम पर धन नहीं लिया जाता। और सबसे अहम बात यह कि यहां कि पुलिस अकेली व घर से भटकी युवतियों से गश्त करते मिल जाती है, मानवीय कर्तव्य निभाते हुये युवती को उनके परिजनों के सुपुर्द कर देती है। ,,,,संपतिहा और सौनौली के आरोपी पुलिसकर्मियों को नौतनवा पुलिस से सीख़ लेना चाहिये ? कि ऐसे होती है पुलिसिंग ।





