गजब : गोरखपुर सोनौली हाइवे पर NHAI ने ललाइन पैसिया से कोल्होई की 8 KM की दूरी को दर्शाया 13 KM

गजब : गोरखपुर सोनौली हाइवे पर NHAI ने ललाइन पैसिया से कोल्होई की 8 KM की दूरी को दर्शाया 13 KM

गजब : गोरखपुर सोनौली हाइवे पर NHAI ने ललाइन पैसिया से कोल्होई की 8 KM की दूरी को दर्शाया 13 KM
(रिजवान खान)
आई एन न्यूज कोल्हुई डेस्क:
निर्माणाधीन गोरखपुर–सोनौली NH-24 हाइवे पर एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। National Highways Authority of India (NHAI) द्वारा लगाए गए एक साइनबोर्ड पर ललाइन पैसिया से कोल्होई की वास्तविक 8 किलोमीटर दूरी की जगह 13 किलोमीटर दर्शा दी गई है। जबकि जमीनी हकीकत में दोनों स्थानों के बीच की दूरी केवल 8 किलोमीटर ही है।
यह पूरा मामला इंडोनेपाल न्यूज के कैमरे में कैद एक तस्वीर से उजागर हुआ है। संबंधित साइनबोर्ड इस व्यस्त अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है।
कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?
जब इस मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया कि यह गलती संभवतः गूगल मैप को सही तरीके से न समझ पाने के कारण हुई है।
दरअसल, जब उसी साइनबोर्ड के नीचे गोरखपुर की दिशा में खड़े होकर गूगल मैप पर कोल्होई सर्च किया जाता है, तो मैप 13 किलोमीटर की दूरी दिखाता है। लेकिन मैप मोहनापुर बाइपास से लगभग ढाई किलोमीटर आगे ले जाकर यू-टर्न करवाता है और फिर वापस उसी स्थान से कोल्होई की ओर रूट दर्शाता है।
वहीं, यदि उसी स्थान से कोल्होई की दिशा की सड़क की ओर रुख करके गूगल मैप पर सर्च किया जाए, तो दूरी सही यानी 8 किलोमीटर ही दिखाई देती है।
इससे स्पष्ट होता है कि संबंधित कर्मचारी ने यू-टर्न वाले रूट को बिना समझे ही मैप में दर्शाई गई 13 किलोमीटर दूरी के आधार पर साइनबोर्ड तैयार करवा दिया।
अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर गंभीर लापरवाही
गोरखपुर–सोनौली हाइवे भारत को नेपाल से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक तथा व्यापारी आवागमन करते हैं। ऐसे में गलत दूरी दर्शाने वाला साइनबोर्ड यात्रियों को भ्रमित कर सकता है और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
सुधार की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि NHAI को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर साइनबोर्ड में आवश्यक सुधार कराना चाहिए, ताकि भविष्य में यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अब सवाल यह है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में इस तरह की मूलभूत त्रुटि कैसे हो गई? क्या बिना भौतिक सत्यापन के केवल डिजिटल मैप के आधार पर साइनबोर्ड तैयार किए जा रहे हैं?
इस मामले में त्वरित जांच और सुधार की आवश्यकता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इस हाइवे की विश्वसनीयता बनी रहे।
महाराजगंज– उत्तर प्रदेश।

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