संपादकीय–शिकंजा हुर्रियत पर
संपादकीय——-
शिकंजा हुर्रियत पर
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वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के बढ़ते खतरे और तेजी से बदलते परिदृश्य के दृष्टिगत अब समय आ गया है जब विश्व के सभी देश अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर इसे जड़ मूल समेत उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट प्रयास करें । इसके लिए सबसे पहले अपने देश में पल रहे आस्तीन के सांपों का फन कुचलना होगा, जिनके सहयोग से विदेशों में बैठे आतंकी संगठनों का मनोबल बढ़ रहा है। इस दिशा में पहल करते हुए भारत ने करीब दो दशक से अधिक समय से जम्मू कश्मीर में अलगाववाद का जहर घोल रहे अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़ो पर प्रतिबंध का शिकंजा कसने की की तैयारी शुरू कर दी है। इन्हें गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार ऐसे किसी भी संगठन को गैरकानूनी संगठन करार देकर (यूएपीए) के तहत प्रतिबंध लगा सकती है जिस पर केंद्र को लगता है कि यह संगठन अवैध गतिविधियों में लिप्त है। टेरर फंडिंग के एक मामले की जांच के दौरान चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसके बाद हुर्रियत कान्फ्रेंस को प्रतिबंधित करना जरूरी हो गया है। जांच में इस बात के सबूत मिले हैं कि हुर्रियत कान्फ्रेंस का हिस्सा रहे संगठन कश्मीरी छात्रों को एमबीबीएस सीट देने के मामले में उम्मीदवारों से एकत्र किए गए धन का उपयोग केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवादी संगठनों के वित्त पोषण के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा बलों पर पथराव स्कूलों को जलाने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने एवं अपराधिक षड्यंत्रओं के जरिए देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने में इस धन का उपयोग किया जा रहा है, ताकि घाटी में शांति की बहाली को रोका जा सके। इसके पूर्व भी कई ग़ैर क़ानूनी मामलों में हुर्रियत नेताओं की मिलीभगत सामने आ चुकी है ऐसे में हुर्रियत पर प्रतिबंध के लिए कई मामलों को शामिल किया जा सकता है। इसमें एनआईए ने टेरर फंडिंग के मामले में दोनों धड़ो के कई नेताओं को गिरफ्तार किया था जो 2017 से ही जेल में हैं। इनमें सैयद अली शाह गिलानी के दामाद सहित कई नामी-गिरामी सफेद पोस को शामिल हैं। भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और सारे देश द्रोही मानसिकता वाले संगठन बौखलाए हुए हैं । घाटी में शांति बहाली ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है । यह देशद्रोही पूरे देश में फैले हुए हैं, और देश को अशांत करने के लिए गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त हैं। हुर्रियत जैसी चरित्र वाले सभी संगठनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। देश के दूसरे स्थानों पर भी इस तरह के संस्थाएं हैं, यह तो सतत निगाह रखने की जरूरत है। इसके लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा।
(इंडो नेपाल न्यूज़)





