परसा सुमाली में मनरेगा घोटाले की बू! 90 की हाजिरी, 40 मजदूर और सवाल उठाते ही बवाल

परसा सुमाली में मनरेगा घोटाले की बू! 90 की हाजिरी, 40 मजदूर और सवाल उठाते ही बवाल
आई एन न्यूज नौतनवा डेस्क:
विकासखंड नौतनवा के ग्राम सभा परसा सुमाली में मनरेगा के तहत चल रहे चकबंद कार्य में सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब मौके पर पहुंचे दो पत्रकारों ने कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों की संख्या को लेकर सवाल उठाए। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि पत्रकारों और मजदूरों की निगरानी कर रहे एक व्यक्ति के बीच तीखी नोकझोंक हो गई और स्थिति हाथापाई तक पहुंचने की नौबत आ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मनरेगा कार्य की मस्टर रोल में 90 मजदूरों की हाजिरी दर्ज थी, जबकि मौके पर करीब 40 मजदूर ही कार्य करते मिले। पत्रकारों ने जब मौजूद मजदूरों से बाकी मजदूरों के बारे में जानकारी मांगी तो अधिकांश ने चुप्पी साध ली।
इसी दौरान मजदूरों की मॉनिटरिंग कर रहा एक व्यक्ति पत्रकारों पर भड़क गया और कथित रूप से मजदूरों को भी उकसाते हुए विवाद करने लगा। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और मामला थाने तक पहुंच गया।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
गांव के कई लोगों का आरोप है कि रोज सुबह करीब 90 लोगों को कार्यस्थल पर बुलाकर उनकी फोटो खींची जाती है। इसके बाद 30 से 40 लोगों को वापस भेज दिया जाता है, जबकि शेष मजदूरों से काम कराया जाता है। आरोप है कि जो लोग काम नहीं करते, उन्हें केवल फोटो खिंचवाने के एवज में 50 से 60 रुपये देकर भेज दिया जाता है और उनकी उपस्थिति दर्ज कर ली जाती है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
रोजगार सेवक ने मांगी माफी
सूत्रों के अनुसार, विवाद बढ़ने और मामला थाने पहुंचने के बाद संबंधित रोजगार सेवक ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए क्षमा मांग ली। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और तत्काल के लिए मामला शांत हो गया।
भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
अब लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
महाराजगंज— उत्तर प्रदेश।


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