भैरहवा जल उठा, सन्नाटे में तब्दील हुआ शहर: तीन दिन बाद भी पसरा है खौफ”

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भैरहवा जल उठा, सन्नाटे में तब्दील हुआ शहर: तीन दिन बाद भी पसरा है खौफ"
भैरहवा के बुध चौक से शुरू हुआ था आंदोलन.

भैरहवा/सोनौली (इंडो नेपाल न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट): नेपाल के भैरहवा शहर और भारतीय सीमा सोनौली बॉर्डर से सटे नेपाली इलाकों में बीते तीन दिन पहले जो उग्र प्रदर्शन हुआ, उसकी गूंज आज भी लोगों के दिलों में सुनाई दे रही है। जेनजी प्रदर्शनकारियों ने गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, भंसार (कस्टम) कार्यालय, बुद्ध चौक, अदालत और अन्य कई प्रमुख स्थानों को आग के हवाले कर दिया था। इस घटना ने शहर की रफ्तार थाम दी है — सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, बाजार बंद हैं और आमजन भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
ग्राउंड ज़ीरो से तस्वीरें बदलती हुई, पर डर अब भी कायम
इंडो-नेपाल न्यूज़ की टीम ने आज दोपहर घटनास्थल यानी ग्राउंड जीरो का दौरा किया। वहां जो दृश्य देखा गया, वो किसी युद्ध के बाद की स्थिति से कम नहीं था। हालांकि गौतम बुद्ध एयरपोर्ट पर स्थिति सामान्य दिखी — उड़ानों का संचालन जारी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नगण्य है।

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गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा.

सरकारी अधिवक्ता कार्यालय में जले हुए कागजातों को समेटा जा रहा है और साफ-सफाई का काम चल रहा है। भंसार कार्यालय (कस्टम) में कार्य धीरे-धीरे शुरू हो गया है, लेकिन मालवाहक ट्रकों की आवाजाही अब भी रुकी हुई है। केवल सीमित छोटे वाहन और बाइक सड़कों पर दिखाई दिए, लेकिन वे भी गिने-चुने।
भैरहवा जल उठा, सन्नाटे में तब्दील हुआ शहर: तीन दिन बाद भी पसरा है खौफ"सन्नाटे की चादर ओढ़े भैरहवा
भैरहवा शहर के प्रमुख चौराहों — गल्ला मंडी, मिलन चौक, बुद्ध चौक, देवकोटा चौक, आंख अस्पताल चौराहा — पर हालात बेहद सुस्त हैं। छुटपुट दुकानें जरूर खुली हैं, लेकिन उनमें न तो ग्राहक हैं और न ही खरीदारी का कोई माहौल। आंख अस्पताल समेत कई भैरहवा जल उठा, सन्नाटे में तब्दील हुआ शहर: तीन दिन बाद भी पसरा है खौफ"प्रमुख संस्थान अभी भी पूरी तरह से बंद हैं।
शहर में सुरक्षा बल पूरी तरह से नदारद हैं। नेपाल के राष्ट्रीय राजमार्गों पर न पुलिस दिख रही है, न कोई चेकिंग। स्थानीय लोग भी केवल ज़रूरत पर ही बाहर निकल रहे हैं। पूरा शहर जैसे ख़ुद को घरों में कैद कर चुका हो।
भारत-नेपाल सीमा पर आंशिक सामान्य स्थिति
सोनौली बॉर्डर की स्थिति की बात करें तो धीरे-धीरे नेपाली नागरिकों का भारतीय सीमा में प्रवेश फिर से शुरू हो गया है। हालाँकि भारतीय नंबर के वाहन अब तक नेपाल में प्रवेश करते नहीं दिखे हैं। इसका मुख्य कारण आम जनमानस में व्याप्त डर और अस्थिरता है।
क्या शांति लौटी है?
सरकार की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है और शांति बहाल हो चुकी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोगों के चेहरों पर अब भी डर साफ देखा जा सकता है। सड़कों पर पसरा सन्नाटा, बंद बाजार और गैरमौजूद सुरक्षाकर्मी यह बयां करते हैं कि असली शांति अब भी लौटनी बाकी है।
भैरहवा समेत पूरा सीमावर्ती इलाका इस वक्त एक अजीब से ठहराव से गुजर रहा है। जहां हालात धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं जनजीवन अब भी डरा-सहमा है। सवाल ये है कि आखिर ये सन्नाटा कब टूटेगा? और क्या प्रशासन जनता के डर को खत्म कर पाएगा?

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महाराजगंज –उत्तर प्रदेश।

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