बर्तन मांजने से अंतरराष्ट्रीय पहलवान बनने तक: देवा थापा की संघर्षगाथा, सोनौली बॉर्डर पर फंसे तो लोगों ने घेर लिया
बर्तन मांजने से अंतरराष्ट्रीय पहलवान बनने तक: देवा थापा की संघर्षगाथा, सोनौली बॉर्डर पर फंसे तो लोगों ने घेर लिया
आई एन न्यूज सोनौली डेस्क:
नेपाल के प्रसिद्ध पहलवान देवा थापा इन दिनों भारत-नेपाल सीमा पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले देवा थापा जब अपने परिवार के साथ भारत से नेपाल लौट रहे थे, उसी दौरान नेपाल में चुनाव और मतदान को लेकर सीमा सील होने के कारण वे सोनौली बॉर्डर पर कुछ समय के लिए आज फंस गए।
बॉर्डर पर मौजूद लोगों ने जब उन्हें पहचाना तो उनके साथ फोटो खिंचवाने और हाल-चाल जानने के लिए भीड़ जुट गई। इसी दौरान उन्होंने इंडो नेपाल न्यूज़ से खास बातचीत में अपने संघर्षभरे जीवन और सफलता की कहानी साझा की तथा युवाओं को संदेश भी दिया।
संघर्ष से बनी पहचान
देवा थापा ने बताया कि उनका जीवन शुरू से आसान नहीं रहा। बेहतर भविष्य की तलाश में वे भारत आए थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने घरों में बर्तन साफ करने और छोटे-मोटे काम करके जीवनयापन किया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने कुश्ती की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए अपनी अलग पहचान बनाई।
युवाओं को दिया प्रेरणादायक संदेश
बॉर्डर पर बातचीत के दौरान देवा थापा ने अपने लाखों फॉलोअर्स और युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि
“जीवन में कठिनाइयाँ जरूर आती हैं, लेकिन अगर इंसान मेहनत और धैर्य नहीं छोड़ता तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है।”
उन्होंने युवाओं से खेलों में आगे आने, नशे से दूर रहने और अपने लक्ष्य पर लगातार मेहनत करने की अपील की।
सीमा सील होने से हुई परेशानी
देवा थापा अपने पूरे परिवार के साथ नेपाल लौट रहे थे, लेकिन नेपाल में चुनाव और मतदान के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया था। इसके कारण उन्हें सोनौली बॉर्डर पर कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा।
हालांकि इस दौरान लोगों ने उन्हें पहचान लिया और उनसे बातचीत करते हुए उनकी कुशल-क्षेम पूछी।
देवा थापा ने कहा कि भारत ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और यहां के लोगों का प्यार हमेशा याद रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीमा खुलने के बाद वे सुरक्षित अपने वतन नेपाल पहुंच जाएंगे।
महाराजगंज– उत्तर प्रदेश।








































