23 महीने बाद घर लौटे इरफान सोलंकी, जेल से निकलते ही पत्नी को देख भर आईं आंखें
23 महीने बाद घर लौटे इरफान सोलंकी, जेल से निकलते ही पत्नी को देख भर आईं आंखें
आई एन न्यूज महाराजगंज डेस्क:
करीब 23 महीनों के लंबे इंतजार, तमाम कानूनी लड़ाइयों और भावनात्मक उथल-पुथल के बाद समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी आखिरकार मंगलवार शाम 6 बजे महाराजगंज जिला जेल से रिहा हो गए। जेल के बाहर जमा समर्थकों ने जैसे ही अपने नेता को सलामत देखा, माहौल नारेबाजी से गूंज उठा।
लेकिन इस पूरे नाटकीय दृश्य का सबसे भावुक पल वो था, जब इरफान सोलंकी की नज़र अपनी पत्नी नसीम सोलंकी पर पड़ी। महीनों से चली आ रही तन्हाई और संघर्ष जैसे ही खत्म हुए, उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने आगे बढ़कर पत्नी को गले लगाया, और दोनों की आंखों में एक ही सवाल था – “अब और कितना दूर रहना बाकी है?”
इरफान सोलंकी की रिहाई की खबर पहले से ही सामने आ चुकी थी। ऐसे में सुबह से ही जेल के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी।
रिहाई से पहले पूरी हुई कानूनी प्रक्रिया
इरफान सोलंकी की रिहाई उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद संभव हो सकी। सोमवार को कोर्ट ने उनकी रिहाई के आदेश जारी किए थे। मंगलवार को जेल अधीक्षक वी. के. गौतम ने सभी दस्तावेजों की पुष्टि कर रिहाई प्रक्रिया पूरी की। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि रिहाई में थोड़ी देरी सिर्फ प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण हुई।
गंभीर आरोपों के चलते रहे थे जेल में
गौरतलब है कि इरफान सोलंकी को 22 दिसंबर 2022 को कानपुर जेल से प्रशासनिक आधार पर कड़ी सुरक्षा में महाराजगंज जेल भेजा गया था। उन पर जमीन पर कब्जा, महिला का मकान जलाने, रंगदारी मांगने और फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए एक बांग्लादेशी नागरिक को भारतीय पहचान दिलाने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उन पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सियासी गलियारों में हलचल
इरफान की रिहाई के साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह है, वहीं विपक्ष भी इसे लेकर अब प्रतिक्रिया देने की तैयारी में है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इरफान अब फिर से राजनीति में सक्रिय होंगे? या परिवार के साथ कुछ वक्त बिताना चाहेंगे?
घर की ओर रवाना, समर्थकों ने किया विदा
जेल से बाहर निकलने के बाद इरफान सोलंकी ने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाकर समर्थकों का धन्यवाद किया और फिर अपनी पत्नी के साथ अपने घर की ओर रवाना हो गए। जाते-जाते उन्होंने सिर्फ इतना कहा –
मैं उन सभी लोगों का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने इस मुश्किल वक्त में मेरा साथ नहीं छोड़ा। सच कभी छुपता नहीं।”
इस रिहाई ने न केवल एक परिवार को फिर से जोड़ा, बल्कि एक बार फिर ये याद दिला दिया कि राजनीति की राह भले ही कांटों से भरी हो, लेकिन इंसानी जज्बात हर दीवार को तोड़ सकते हैं।
महाराजगंज– उत्तर प्रदेश।





