वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर भव्य आयोजन, लाल किले से गूंजा देशभक्ति का स्वर
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर भव्य आयोजन, लाल किले से गूंजा देशभक्ति का स्वर
आई एन न्यूज नई दिल्ली डेस्क: भारत अपनी स्वतंत्रता के 80 साल पूरे होने के अवसर पर जश्न मना रहा है। 1947 में मिली आजादी के बाद से हर साल देश का मुख्य समारोह लाल किले पर होता है। आज पीएम मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण करने के बाद परेड की सलामी ली। प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार देशवासियों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का संबोधन करीब 75 मिनट तक चला, इसमें उन्होंने उनकी सरकार में देश में हुई प्रगति का जिक्र किया।
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चल रहे समारोहों के क्रम में लाल किले पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। देशभक्ति के जोश और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। लाल किले की प्राचीर को फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। सजावट के बीचों-बीच राष्ट्रीय ध्वज और उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम’ अंकित किया गया था।
समारोह के दौरान सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम’ की धुन प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और लोगों ने भी पूरे उत्साह के साथ राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान की धुन गूंजी और राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी गई।
समारोह को और भव्य बनाते हुए भारतीय वायु सेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टरों ने कार्यक्रम स्थल पर फूलों की वर्षा की। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ रहा था, जबकि दूसरे हेलीकॉप्टर पर ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ ध्वज लहरा रहा था। इस दृश्य ने समारोह में मौजूद लोगों में देशभक्ति और गौरव की भावना को और मजबूत कर दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत बना ‘वंदे मातरम’
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा वर्ष 1875 में रचित ‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा और संघर्ष का शक्तिशाली प्रतीक बन गया था। स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम के भाव से अपनाया और यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जन की आवाज बन गया।
वर्ष 1950 में संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया। इसके बाद से यह देश के राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता संघर्ष की विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।
सालभर चल रहे हैं विशेष समारोह
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पिछले वर्ष नवंबर में सालभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की थी। इन आयोजनों का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और देश की सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना में इसके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ की धुन, तिरंगे की शान और वायु सेना के हेलीकॉप्टरों से हुई पुष्पवर्षा ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को विशेष बना दिया। पूरे आयोजन में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली विरासत की झलक देखने को मिली।






























