कुशीनगर में मिले नेपाल के दो महिला समेत पांच शव, सोनौली बॉर्डर पहुंचा

कुशीनगर में मिले नेपाल के दो महिला समेत पांच शव, सोनौली बॉर्डर पहुंचा
आई एन न्यूज सोनौली डेस्क: पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में आई फ्लैश फ्लड की भयावहता अपने साथ बहाकर भारत तक ले आई गंडक नदी की तेज धार में बहते हुए नेपाल के पांच लोगों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले तक पहुंच गए। मंगलवार को इन शवों को भारतीय अधिकारियों की टीम सोनौली बॉर्डर लेकर पहुंची, जहां नेपाल के अधिकारियों से समन्वय कर शवों को नेपाल प्रशासन के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
मंगलवार शाम करीब चार बजे कुशीनगर जिले से उपजिलाधिकारी विवेकशील यादव, तहसीलदार देवेंद्र यादव और तहसीलदार संदीप यादव दो महिलाओं और तीन पुरुषों के शव लेकर सोनौली बॉर्डर पहुंचे। बताया गया कि नेपाल में आई अचानक बाढ़ के दौरान ये लोग गंडक नदी की तेज धारा में बह गए थे। यही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद नारायणी और बड़ी गंडक नदी के रूप में आगे बढ़ती है।
कुशीनगर जिले में इन पांच शवों को नदी से बरामद किया गया था। इनमें दो शव बरवा पट्टी थाना क्षेत्र तथा तीन शव खड्डा थाना क्षेत्र से बरामद हुए थे। शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए भारतीय प्रशासन ने नेपाल प्रशासन से संपर्क स्थापित किया।
सोनौली बॉर्डर पर पहुंचने के बाद नेपाल के बेलहिया थाना प्रभारी उपनिरीक्षक हरिराम डांगी को शव सौंपने की कार्रवाई शुरू की गई। सभी पांच शवों को शव वाहनों के माध्यम से नेपाल के बुटवल भेजा जा रहा है। वहां नेपाल पुलिस द्वारा शवों की पहचान कराए जाने के बाद उन्हें उनके परिजनों तक पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में सोनौली थाना अध्यक्ष महेंद्र मिश्रा ने बताया कि कुशीनगर से पांच शव सोनौली लाए गए हैं। नेपाल पुलिस को शव सुपुर्द करने के बाद सभी शवों को बुटवल भेजा जा रहा है। वहां नेपाल पुलिस शवों की पहचान कराकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की कार्रवाई करेगी।
गंडक नदी की उफनती धाराओं में बहकर भारत पहुंचे इन पांच शवों की कहानी बेहद मार्मिक है। सीमा ने भले ही दोनों देशों को अलग किया हो, लेकिन इंसानियत की डोर ने एक बार फिर दोनों देशों को जोड़ दिया। भारतीय प्रशासन द्वारा शवों को सम्मानपूर्वक नेपाल प्रशासन तक पहुंचाने की यह पहल उन परिवारों को उनके अपनों की अंतिम निशानी तक पहुंचाने की कोशिश है, जो शायद कई दिनों से अपने प्रियजनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
महाराजगंज— उत्तर प्रदेश।