कुंवर ख़ेमे को सुधीर व गुड्डू खान जैसे चेहरों की दरकार
कुंवर ख़ेमे को सुधीर व गुड्डू खान जैसे चेहरों की दरकार
( निकाय चुनाव के बाद धर्मेंद्र चौधरी का सियासी विश्लेष्ण)

नौतनवा व सोनौली के नगर निकाय चुनाव परिणामों ने क्षेत्र के सियासतदारों की जनपैठ़ -तस्वीर साफ कर दी है। पूर्व विधायक मुन्ना सिंह व पूर्व संसद सदस्य कुंवर अखिलेश सिंह के “खेमे” के लिये निकाय चुनाव परिणाम निराशा जनक रहे। वहीं दूसरी तरफ विधायक अमनमणि त्रिपाठी “ख़ेमे” के लिये दोहरी खुशी की बात रही। विधायकी और फिर उसके बाद विधान सभा क्षेत्र दोनों शहरी अध्यक्ष पदों पर कब्जा, वो भी निर्दल ही। निश्चितरुप से यह दर्शाता है कि “मणि खेमा” जमीनी सियासत में पास रहा। सुधीर त्रिपाठी व गुड्डू खान ने बड़े बड़ों को अपनी सीमित ही सही, मगर राजनीति का लोहा मनवा दिया। सवालयह उठ़ता है कि “कुवंर खेमें” की राजनीति निकाय चुनाव में फेल क्यों रही।,,बहुत टटोलने पर यही निष्कर्ष निकला कि कुंवर खेमें में सुधीर त्रिपाठी व गुड्डू खान जैसे चेहरे नहीं हैं। कुंवरख़ेमे को अब मनन की जरुरत है, क्योंकि उसे सुधीर और गुड्डू खान जैसे चेहरों की दरकार है। कुंवरव मणि खेमे की द्वंदता के बीच यहां की राजनीति में भाजपा के भी प्रवेश का एक मौका दिख तो रहा है। मगर जो चेहरे भाजपा के अनुयायी के रुप में है, वो कुंवर या मणि खेमें की तरह जनविश्वास जीतने में पीछ़े प्रतीत हो रहे हैं।
फिलहाल कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि निकाय चुनाव परिणामों ने कुंवर खेमें के चिंतन व मनन को बढ़ा दिया है। 
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