योगी जी! ध्यान दें।————————— यहां लोग भाजपा को आजीवन वोट़ न देने की ले रहे शपथ
योगी जी! ध्यान दें।——–
यहां लोग भाजपा को आजीवन वोट़ न देने की ले रहे शपथ
आईएनन्यूज, नौतनवा से धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट:
विडंबना देखिये! एक तरफ जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुशासन व विकास की दुहाई देकर गोरखपुर उप-चुनाव व २०१९ लोक सभा चुनाव में सफलता के दावे कर रहे हैं। वहीं दूसरे तरफ उनके राजनैतिक गृह जनपद गोरखपुर से सट़े महराजगंज में एक गांव के सैकड़ों लोग भाजपा को आजीवन वोट़ न देने की शपथ ले रहे हैं।
यह गांव है नौतनवा थानाक्षेत्र का कुरहवां ।

“कुरहवां” गांव का नाम आते ही यहां के जनप्रतिनिधियों, अख़बारी व मीड़िया के लोगों तथा प्रशासनिक अमले को बात समझ में आ गयी होगी। कुछ़-कुछ़ या थोड़ी-बहुत? ये तो समझने वालों पर निर्भर करता है । मगर अब बड़ी बात यह उभर रही है कि लोग किसी राजनैतिक दल को आजीवन मतदान न करने की शपथ ले, वो भी सैकड़ों की संख्या में,,
पड़ताल तो बनती है। कि ऐसा क्यों हो रहा है। यह सब राजनीतिक दलों की होड़वश है? जैसा कि पुराना दस्तूर रहा है? या फिर सचमुच कुछ़ गलत हो रहा है?
ऐसा लोकतंत्र जिसके संविधान में जनभावनाओं को सर्वोपरि माना जाता हैं। वहां एक जनसमुह यह शपथ ले कि हम फलां दल को कभी वोट़ नहीं करेंगे।
७ जनवरी को एसएसबी व गांव के कुछ़ लोगों में विवाद हुआ। इस विवाद में एसएसबी द्वारा गोली चल गयी। गोली गांव के निवासी कमलेश पासवान के पैर में लगी। अत्यधिक रक्त स्राव से कमलेश की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गयी।
ग्रामीण इस घट़ना से आक्रोश में आये। मार्ग जाम किया, हत्यारों के गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस अपने भूमिका में आयी। ग्रामीणों के आक्रोश को जैसे तैसे शांत किया। अज्ञात एसएसबी जवानों पर मुकदमा हुआ। एसएसबी ने 
भी अज्ञात ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज कराया।
फिर मृतक कमलेश के परिजनों के पास नेताओं के आने का सिलसिला शुरु हुआ। सत्ताधारी भाजपा के नेता या स्थानीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी मृतक कमलेश के परिजनों को उतना संतोष नहीं दे पाये जितना कि सपा के पूर्व विधायक मुन्ना ने दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो लाख रुपये का सहयोग दिया।
यह तो पूरे घटनाक्रम का मोटामोट़ी सार रहा।
अब मृतक कमलेश के परिजनों के मूवमेंट पर नज़र ड़ालें तो ७ जनवरी से २ मार्च आ गया। परिजन मांग कर रहे हैं कि हत्यारे गिरफ्तार हों। कैंड़िल मार्च निकाला, धरना प्रदर्शन किया, भूख हड़ताल पर बैठ़े।
हर बार आश्वसन मिला, एसडीएम, एड़ीएम, एएसपी तथा कमिश्नर अनिल कुमार तक आश्वस्त किये कि दोषी पकड़ लिये जायेंगे। करीब दो माह बाद भी नतीज़ा सिफ़र है।
२८ फरवरी बुधवार को नौतनवा कस्बा के गांधी चौक पर कमलेश की पत्नी सरिता, अखिलेश, हिमालय, रामकुमार, केतकी, बासमती, शीला, सुनीता, भूषण,चंद्रावती, भानमती समेत करीब ७० लोग एक दिवसीस भूख़ हड़ताल पर बैठ़ हत्यारों के गिरफ्तारी की मांग की। गुरुवार को सौ 
से अधिक ग्रामीणों ने भाजपा को कभी वोट़ न देने की शपथ ली।
यही जन समुह पांच मार्च के बाद गोरखपुर उप-चुनाव में गांव गांव घूमने की तैयारी में है। यह कहने की तैयारी में कि भाजपा को वोट़ न दे।
जन समुह है, तो सियासत होना ही है। ,,मगर हर चीज़ों को सियासत के ही चश्में से देख़ना हर बार बाजिब़ भी नहीं होता।
बाकी ,,तो सीएम योगी खुद ही समझदार हैं। इंड़ोनेपाल न्यूज का कर्तव्य था सच्चाई व संपूर्ण प्रकरण को पाठ़कों के समक्ष रखना। सीएम साहब भी ट्विटर या शोसल मीड़िया के माध्यम से यह पढ़ ही लेंगे।
,,और,,शीर्षक में ध्यान करा ही दिया गया है।





