भैरहवा मेडिकल कालेज का “अंडरवर्ड” ?
भैरहवा मेडिकल कालेज का “अंडरवर्ड” ?
आई एन न्यूज भैरहवा से गुड्डु जायसवाल व धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट:
नेपाल के रुपंदेही जिला के भैरहवा कस्बा में स्थित यूनिवर्सल कालेज आफ मेड़िकल एंड साइंस में भारतीय छ़ात्रों के उत्पीड़न की बात उजागर होने के बाद से कालेज प्रशासन के होश फाख्ता हो गये हैं। कुछ़ भारतीय नेताओं की शिकायत के बाद नेपाली स्थित भारतीय दूतावास ने मेड़िकल कालेज प्रशासन को जवाब तलब किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक कालेज प्रशासन अब भारतीय छ़ात्रों, उनके अभिभावकों व कुछ़ मीड़िया हाउसों को मैनेज़ करने में जुट़ गया है, और काफी हद तक सफल भी होने की खबर है।
जिन छ़ात्रों ने मेड़िकल कालेज की व्यवस्था पर सवाल उठ़ाते हुए “ह्विसिल ब्लोवर” की भूमिका निभाई थी। उन छ़ात्रों पर कालेज प्रशासन ने निगरानी बैठ़ा दी है। इसी माह में उनकी परीक्षा भी होनी है। इसलिए छ़ात्र भी अपने हास्टल के कमरों से बाहर कम नज़र आ रहे हैं।
१ अप्रैल को कई भारतीय छ़ात्रों के अभिभावक मेड़िकल कालेज पहुंचे थे। कालेज प्रशासन से अभिभावकों की वार्ता भी हुई। लेकिन कालेज प्रशासन ने मामले को मीड़िया तक न पहुंचाने के लिए अभिभावकों की भी मुनहारी की।
नेपाल के कुछ़ मीड़िया कर्मी कालेज तक पहुंचे,मामले को जानने व पड़ताल करने। परंतु कालेज प्रशासन ने मीड़िया से दूरी बनाई रखी।
बतादें कि भैरहवा स्थित मेड़िकल कालेज कई बार कुछ़ बड़े विवादों को लेकर चर्चा में आ चुका है। कुछ़ वर्ष पूर्व मेडिकल कालेज के मालिकानों में भारत के मोस्ट़ वांटेड़ अंडरवर्ड डान दाउद इब्राहिम का भी नाम आया था। इस मुद्दे को लेकर भारत सरकार भी काफी गंभीर हुई थी, और मामला सरकारों की वार्ता से लगाये संयुक्त राष्ट्र संघ तक भी पहुंचा था। जिसके बाद कालेज के कागज़ातों के मालिकान लिस्ट से दाउद इब्राहिम का नाम हटा दिये जाने की खबर है।
इंड़ोनेपाल न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक मेड़िकल कालेज ने कई प्राइवेट मकानों व होट़लों को हास्ट़ल के लिए “लीज” पर ले रखा है। जिसमें से कई मकानों के मालिक भारतीय खुफिया विभागों के रजिस्टर में संदिग्ध “आईएसआई एजेंट़” के रुप में दर्ज बताये जाते हैं। यह तमाम चीजें कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नेपाल में स्थित मेड़िकल कालेज में भारतीय छ़ात्रों से फीस की रकम नेपाली में न लेकर भारतीय मुद्रा में लिया जाना। यह प्रदर्शित करता है कि कालेज प्रशासन मौका परस्त व्यवसाईकरण के हर छ़ोटे छ़ोटे पहलुओं को लपकने में भी तनिक गुरेज नहीं करता है। जिसका परिणाम यह कि आये दिन कालेज में भारतीय छ़ात्रों के उत्पीड़न की आवाज़ रह रह कर मुख़र हो रही है। साफ़ है कि कालेज की चमचमाती बिल्ड़िंग की आड़ में एक “स्याह अंडरवर्ड” भी है। जिसका प्रयोजन व्यवसायिक तक तो ठ़ीक है, लेकिन इसी कालेज कैंपस से भारतीय छ़ात्रों के उत्पीड़न व “नेपाली-भारतीय ” जैसी द्वंदता भाव उत्पन्न करने वाली बातें सामने आना निश्चित रुप से जांच और चिंता का विषय है।





