बजट…और सरकार ने ब्रेक लगाकर ले लिया यू-टर्न।
आई एन न्यूज दिल्ली डेस्क:
अंतरिम बजट की तैयारी में लगी केन्द्र सरकार के सामने बीते पांच साल के दौरान वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने की अहम चुनौती रही है।कार्यकाल के शुरुआती तीन साल में मोदी सरकार ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। जिसके बाद उम्मीद की जाने लगी कि सरकार के पांच साल के रिपोर्ट कार्ड में वित्तीय घाटा संभालने पर उसे पूरे नंबर मिलेंगे। लेकिन सरकार ने जुलाई 2017 में देशभर में जीएसटी लागू करने का फैसला लिया और इस फैसले से सफलता की दिशा में बढ़ रही सरकार को यू-टर्न मिल गया।
इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी के मुताबिक केन्द्र की मोदी सरकार ने 2014 में कार्यभार संभाला तब देश वित्तीय घाटे को संभालने की कवायद में जुटा था. केन्द्र सरकार वैश्विक और घरेलू कारणों से अपने कार्यकाल के शुरुआत में इस घाटे पर लगाम लगने वाली बेहद सफल सरकार बनकर उभर रही थी. लेकिन जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी सफलता उसकी असफलता की दिशा में मुड़ गया।
मोदी सरकार के कार्यकाल की 2014 में शुरूआत होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट रही। यह गिरावट केन्द्र सरकार को 2018 के मध्य तक राहत देती रही और इसके चलते इंपोर्ट बिल में हो रही बचत से सरकारी खजाने को अपना घाटा संतुलित करने का मौका मिलता रहा. इसके अलावा इस दौरान केन्द्र और राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर अधिक एक्साइड ड्यूटी और वैट लगाते हुए भी सरकारी खजाने में इजाफा करने का काम किया।





