संगत और मोगली गर्ल पर विशेष—

संगत और मोगली गर्ल पर विशेष---

संगत और मोगली गर्ल पर विशेष—

साथियों,
मनुष्य जीवन में संगत की बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और जैसी संगत मिलती मनुष्य का व्यक्तित्व व कार्यशैली उसी के अनुरूप हो जाती है।अच्छे लोगों की संगत बुरे को भी अपने अनुकूल बना देती है और सोने के साथ सूबर और सुहागा भी सोने जैसा बनकर सोने के भाव बिकने लगता है।कहा भी गया है कि-” संगत ही गुण होता है संगत ही गुण जाय बाँस खांस और मिश्री एकै भाव बिकात”।संगत का ही असर होता है कि वाहन का क्लीनर भी ड्राइवर और डाक्टर का कम्पाउंडर भी सहयोगी चिकित्सक बन जाता है।संगत डाकू को महात्मा बना देती है और महात्मा को डाकू लुटेरा बना देती है।संगत के प्रभाव ने ही बाल्मीक जैसे लुटेरे को ब्रह्मर्षि जैसा बना दिया और कहा भी गया है कि-” उल्टा नाम जपत जग जाना बाल्मीक भये ब्रह्म समाना”।संगत का ही असर है कि तोता पक्षी होते हुये भी राम राम कहने लगता है और हिंसक जीव भी अहिंसक बनकर मनुष्य के गुलाम बनकर उनके इशारे पर चलने लगते हैं।इस समय मोगली गर्ल अखबारों की सुर्खी बनी हुयी है और इंसान से लेकर साइंस विज्ञान तक सब भौचक्कें हैं।इस लड़की को अभी चार दिन पहले बहराइच जिले के जंगलों से बरामद किया गया है।इसकी उम्र आठ साल के आसपास है और उसे बंदरों की झुंड से पकड़ा गया है।इसे पकड़ने के समय बंदरों के व्यापक विरोध का भी सामना करना पड़ा है।वह बंदरों के साथ निर्वस्त्र रहती थी और उन्हीं के साथ रात दिन रहती थी।उसकी सारे हावभाव हरकतें व बोली बंदरों जैसी है तथा मनुष्य होते हुये भी बंदर जैसी बनी हुयी है।उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मामला सरकार तक पहुँच गया है।लड़की बंदरों के बीच कैसे पहुँची और जाड़ा गर्मी बरसात तथा रात में कैसे और कहाँ रहती क्या खाती पीती थी? इसकी मात्र अविश्वसनीय कल्पना ही की जा सकती है।एक लड़की बंदर की संगत में मनुष्यता दूर होने वाली बहराइच की अकेली पहली घटना नहीं है बल्कि इससे पहले भी कई अन्य मोगली समय समय पर प्रकाश में आ चुके हैं। कहते है कि दशकों पहले रामसनेहीघाट बाराबंकी क्षेत्र के चंदौली गाँव में एक मनुष्य भेड़िये की मांद से जीवित मिला था और उसे लोग नरायन कहते थे।शुरूआत में नरायन भी भेड़िये की संगत के कारण शुरुआत में भेड़िये जैसी हरकत करता था। जब तक चावल को लाल रंग में रंगकर उसे खाने के लिये नहीं दिया जाता था वह उसे खाता नहीं था।कुछ दिनों के बाद वह थोड़ा बहुत समझने लगा था और खाना भी खाने लगा। संगत मनुष्य को नर से नारायण और नर से नरपिशाच बना देती है।संगत से ही पशु इंसानों के साथ रहते व उनकी बोली को समझते और वक्त पड़ने पर काम भी आतेे हैं।धन्यवाद ।। भूलचूक गलती माफ।। सुप्रभात / वंदेमातरम् / गुडमार्निग / अदाब / शुभकामनाएँ।। ऊँ भूर्भवः स्वः—–/ ऊँ नमः शिवाय।।।
भोलानाथ मिश्र
वरिष्ठ पत्रकार/समाजसेवी
रामसनेहीघाट,बाराबंकी यूपी।

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