सिपाही को नेपाल में बंधक बनाये जाने का क्या है राज?
सिपाही को नेपाल में बंधक बनाये जाने का क्या है राज?
– विवादों में घिरी भगवानपुर पुलिस की कार्यप्रणाली
आईएन, न्यूज़ महराजगंज डेस्क
भारत-नेपाल के सोनौली व उसके आसपास के सीमाओं की पुलिस अपने कुछ अलग अंदाज के कारनामों से आये दिन चर्चा में रहते हैं। अभी कुछ़ दिन पूर्व ही कुछ कथित तस्करों द्वारा भगवानपुर चौकी के सिपाहियों को पीट दिये जाने का मामला शांत नहीं हुआ कि फिर सिपाही के नेपाल में बंधक बना लिये जाने की ख़बर सामने आ गयी है।
गौर करने वाली बात है कि दोनों विवादों में सिपाही उमेश यादव की उपस्थिति रही। कोतवाल व दारोगा की तैनाती के बाद भी एक सिपाही मात्र का इतना सुपरफास्ट हो जाना, सवाल तो खड़े कर ही रहा है। साथ-साथ इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि भगवानपुर में “पुलिस- बनाम” कुछ़ अलग ही चल रहा है। जो मुख्य विवाद का कारण बन रहा है।
अब इस विवादित सिपाही के अजब कारनामों पर नजर ड़ालें तो, कुछ दिन पहले ही यह एक तहरीर लेकर सोनौली कोतवाली में आया। कोतवाल तेज प्रताप श्रीवास्तव से गुहार लगायी कि शराब तस्करी में लिप्त कुछ़ लोगों ने उसे पीट दिया है। कोतवाल साहब ने अपने मातहत की बात गंभीरता से लिया और पांच नामजद लोगों पर सरकारी काम में बाधा व मारपीट समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। कुछ़ कथित आरोपी हिरासत में लेकर जेल भेज लिये गये और कुछ़ फरार हैं।
विवाद व मुकदमेबाजी के बाद फिर वही तेज़ तर्रार सिपाही नेपाल चला गया। और फिर जाने क्या हुआ कि वह नेपाल पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बंधक बना लिया गया। काफी होहल्ला व पुलिस अधीक्षक महराजगंज के हस्तक्षेप के बाद नेपाल पुलिस ने उसे छ़ोड़ा। सिपाही द्वारा यह सफाई दी जा रही है कि वह किसी अपराधी की धरपकड़ के लिये नेपाल में घुसा था।
सवाल यह कि आखिर भगवानपुर की पुलिस या फिर सिपाही उमेश यादव को क्या ऐसी आन पड़ गयी कि वो भारतीय पुलिसिंग दिखाने नेपाल में घुस गये। दूसरा यह कि विवादों में घिरे सिपाही उमेश यादव पर अधिकारी मेहरब़ान क्यों हैं? चर्चाओं की माने तो यह सिपाही वसूली का कार्यख़ास है। जो सीमावर्ती क्षेत्र में अपनी जेब़ भरने के साथ साथ साहबों को भी अच्छ़े गिफ्ट देता रहता है। यही वसूली पुलिस के लिये विवाद बन कर एक नये रुप में सामने आ रही है।,,,ये अच्छ़ी बात नहीं है।





