वाह रे ! जन जन को न्याय दिलाने का वादा करने वाली गोरखपुर पुलिस

वाह रे ! जन जन को न्याय दिलाने का वादा करने वाली गोरखपुर पुलिस

पत्रकार उत्पीड़न की शिकायत का तीन माह में एफआईआर दर्ज नहीं कर सकी पुलिस—–
आईएन न्यूज गोरखपुर ब्यूरो/गोरखपुर
दबंगों द्वारा विवाद करते हुए वरिष्ठ पत्रकार को जान-माल की धमकी की शिकायत कर उसके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किये जाने की मांग जितेन्द्र कुमार द्वारा थाना गोरखनाथ से लगायत आईजी जोन तथा शासन के उच्चाधिकारियों से किये जाने के तीन माह बाद भी जिले की पुलिस द्वारा उस शिकायती पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं करते हुए यूपी पुलिस की सबसे तेज काम करने वाली ट्वीटर सेवा पर की गयी शिकायत को पट्टीदार का विवाद करार देते हुए दोनों पक्षों में समझौता करा दिया जबकि पत्रकार जितेन्द्र कुमार द्वारा इस मामले में किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं किया गया है और न ही विवाद किये जाने में किसी प्रकार के पट्टीदारी का मामला बताया है। यूपी के गोरखपुर पुलिस की सोशल मीडिया सेल ने बिना शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किये ही अपने विभाग की लापरवाही को छिपाने की गरज से सोशल मीडिया पर यह बात ट्वीट करते हुए मामले की इतिश्री कर दिया।
बताते चलें कि बीते मई माह में गोरखनाथ थाना क्षेत्र के धर्मशाला बाजार स्थित कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा जांच कार्यवाही के दौरान वर्षों से संचालित श्रम नियमों के तहत अपंजीकृत प्रतिष्ठानों पर शमन कार्यवाही करते हुए उनका चालान कर अर्थदण्ड की वसूली किया। उक्त वसूली से नाराज प्रतिष्ठानों के मालिकों ने पहले तो स्थानीय सपा नेता पर निशाना साधा बाद ही यहीं पर रहने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार का नाम आने पर उनसे सम्पर्क किया। पत्रकार ने इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए इसकी पुष्टि श्रम विभाग में कराने की बात कही जिस पर प्रतिष्ठानों के मालिकों ने किनारा कर लिया। वर्षों से अपंजीकृत प्रतिष्ठानों का संचालन करने वाले दुकानदारों का श्रम विभाग द्वारा शमन शुल्क वसूलना इन्हें नागवार लगा और लोगों ने मिलकर साजिश के तहत 30 मई की रात में पत्रकार को घेर कर उन पर हमला कर जान-माल की धमकी तथा श्रम विभाग को दिये गये रकम की मांग करने लगे। पत्रकार ने जब इसका विरोध किया तो वह बवाल पर आमादा हो गये। पत्रकार जितेन्द्र कुमार ने अगले दिन इस घटना की लिखित शिकायत क्षेत्राधिकारी गोरखनाथ से किया जिस पर सीओ गोरखनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल चौकी इंचार्ज धर्मशाला बाजार को दोषी दबंगों के खिलाफ कार्यवाही के लिए निर्देशित किया। दबंगों के प्रभाव में रहने वाले चौकी प्रभारी ने पत्रकार उत्पीड़न के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हुए मामले को दबा दिया। किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं होने पर पत्रकार जितेन्द्र कुमार ने थानाध्यक्ष गोरखनाथ, एसएसपी, डीआईजी, आईजी जोन गोरखपुर सहित शासन के उच्चाधिकारियों व मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इसकी शिकायत किया। यूपी पुलिस की ट्वीटर सेवा पर त्वरित गति से होने वाली कार्यवाही का लाभ मिल सके इसके लिए जितेन्द्र कुमार के अधिवक्ता मित्र मनीष कुमार सिंह ने गोरखपुर पुलिस, डीआईजी रेंज गोरखपुर तथा आईजी जोन गोरखपुर को ट्वीट कर मामले में विधिक कार्यवाही की मांग किया। गोरखपुर की सोशल मीडिया टीम ने बिना शिकायतकर्ता का बयान दर्ज किये ही ट्वीट कर मामले को पट्टीदारों का विवाद बताते हुए दोनों पक्षों में समझौता कराकर अपने विभाग की कमियों को छिपाने का काम किया। जितेन्द्र कुमार ने इस मामले में एसएसपी, डीआईजी, आईजी व मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया कि उनके द्वारा कोई समझौता नहीं किया गया है और न ही आरोपी दबंगों से उनका कोई रिश्ता ही है। वरिष्ठ पत्रकार ने पुलिस अधिकारियों से तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया। जितेन्द्र कुमार ने बताया कि डीआईजी को भेजे गये उनके पत्र पर सीओ गोरखनाथ द्वारा अभी जांच किया जाना बाकी है जबकि पुलिस विभाग के मुख्यालय पर बैठे कर्मियों ने उनके इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर पुलिसिया कार्यप्रणाली को संदिग्ध कर दिया है।
दिलचस्प यह है कि सोशल मीडिया के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक अपनी समस्या सीधे पहुंचाने की मुहिम पर सवालिया निशान लगना इसलिए लाजमी है कि इस तरह की कार्यवाही से फरियादियों को कैसे न्याय मिल सकेगा। उ0प्र0 सरकार से मान्यता प्राप्त रहे वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार ने पुनः पत्र भेजकर दबंगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ ही मामले की इतिश्री करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग किया है।

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