नौतनवा:श्रीश्याम शक्ति धाम मन्दिर मे धूम धाम से मनाया गया हनुमान जयन्ती
नौतनवा:श्रीश्याम शक्ति धाम मन्दिर मे धूम धाम से मनाया गया हनुमान जयन्ती
आई एन न्यूज ब्यूरो नौतनवा :श्री श्याम शक्ति धाम मन्दिर मे श्याम मित्र मन्डल समिति के तत्वावधान मे शनिवार शाम श्री हनुमानजी का जन्मोत्सव बड़े हर्ष उल्लास से माड़वी समाज द्वारा मनाया गया। वहा उपस्थित महिला व पुरुष संगीत संध्या मे भजनो का खुब आनन्द उठाये। भजन गायक कुमार विजय पार्टी द्वारा सुन्दर कान्ड का भक्त गणो ने खुबरसावादन किया। हनुमान जयंती- चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी प्रात: 4 बजे अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था। इनके पिता हैं वानरराज केसरी। इसलिए, इनको केसरीनंदन भी कहते हैं। रामभक्त के रूप में हनुमानजी को सभी जानते हैं। लेकिन उनकी अन्य भी विशेषताएं हैं। वह समस्त वेदों के ज्ञाता, नाना पुराण आख्याता, ज्योतिषी, संगीतज्ञ, वानरराज, यंत्र-मंत्र और तँत्र के सिद्धहस्त होने के साथ-साथ संकटमोचन भी हैं। अकेले उनको ही यह वरदान प्राप्त है । वह समस्त संकट हर सकते हैं। सर्व कार्य सिद्ध कर सकते हैं। वह सूर्य के शिष्य हैं। सूर्य भगवान का जप-तप-ध्यान करने से ही उनको असाधारण सिद्धियां और निधियां प्राप्त हुईं। अणिमा,( आकार बढ़ा सकते हैं) लघिमा ( आकार छोटा कर सकते हैं) गरिमा ( भारी कर सकते हैं), प्राप्ति ( कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं), प्राकाम्य ( सर्व प्रदाता), महिमा( यश-कीर्ति), ईशित्व (ईशरत्व) और वशित्व( वशीकरण) का अधिकार केवल हनुमानजी को ही प्राप्त है। तभी उनको कहा गया-अष्ट सिद्धि-नौ निधियों के दाता।
शनि से है गहरा संबंध
शनि महाराज से भले ही सब कांपते हों लेकिन शनि हनुमान जी से डरते हैं। शनि महाराज को अपनी पूंछ में बांधकर हनुमान जी ने उनको रामसेतू की परिक्रमा करा दी थी। शनि घायल हो गए थे। अपनी पीड़ा को शांत करने के लिए शनि महाराज ने अपने शरीर पर सरसो का तेल लगाया था। इसलिए, शनि महाराज को सरसो का तेल चढ़ाया जाता है। हनुमान जी ने उनको इस शर्त परछोड़ा कि तुम मेरे भक्तों को कष्ट नहीं दोगे। इस बार शनिवार को हनुमान जयंती होने से शनि शांति का अवसर मिल रहा है।
भगवान शंकर के 11 वें रुद्रावतार
हनुमान जी की पूजा से सर्वग्रहों की पीड़ा शांत होती है। यह वरदान उनको भगवान शंकर से प्राप्त हुआ है। वह भगवान शंकर के 11 वें रुद्रावतार हैं। वह रुद्र भी हैं और भोले भी। जिस भाव से उनको भजा जाता है, वह उसी शक्ति में आते हैं। उनकी पूजा अग्नितत्व है। वायु तत्व है। सूर्य को सेब समझकर मुंह में रख लिया। इंद्र ने वार किया तो ठोड़ी पर लगा। संस्कृत में ठोड़ी को हनु कहते हैं।
बस, नाम पड़ गया हनुमान
हनुमान जयंती पूजा शुभ मुहूर्त मे चढ़ता है सिंदूर
हनुमान जी ने एक बार सीता जी से पूछा कि आप सिंदूर क्यों लगाती हैं ? सीता जी ने जवाब दिया कि राम की दीर्घायु के लिए। बस, रामभक्त हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लिया। हनुमान जी के जन्मदिन के मौके पर रात्रि के समय हनुमान जी की पूजा करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है. हनुमानजी के जन्मदिन पर घी में चुटकी भर सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को लेप लगाएं। इससे शनि और राहू का दोष समाप्त होता है।
गुरु हनुमान जी की पूजा
गृहस्थजन शंकरजी के रुद्रावतार के रूप में, व्यापारियों को पवनपुत्र के रूप में, विद्यार्थियों को हनुमान के रूप में, स्त्रियों को अंजनीपुत्र के रूप में, नौकरीपेशा वालों को मंगलमूरति के रूप में, खिलाड़ियों और सैन्य सेवा में रहने वालों को बजरंगबली के रूप में पूजना चाहिए। हनुमान जी को गुरु रूप में पूजने से सर्वग्रह शांति हो जाती है।
उक्त अवसर पर कृष्ण कुमार बेरीवाल, सत्यनारायण अग्रवाल, अनिल अग्रवाल,गौतम जोशी, संतोष चोखानी, पवन बेरीवाल, अजय दोचानिया, दिनेश खेतान,अनिल तुलसियान,शिव तिकड़िवाल, आकाश बेरीवाल,उमेश वेरीवाल, सन्तोष कनोई एवं समस्त युवा मंच के लोग उपस्थित रहे।





