न आरोप, न विवाद—सिर्फ विकास: नौतनवा में ऋषि त्रिपाठी की अलग पहचान
न आरोप, न विवाद—सिर्फ विकास: नौतनवा में ऋषि त्रिपाठी की अलग पहचान
जनता के बीच, जनता के लिए: ऋषि त्रिपाठी की सियासत दिलों को छू रही है।
आई एन न्यूज नौतनवा विधानसभा डेस्क: नौतनवा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में पिछले चार वर्षों में एक अलग तरह की कार्यशैली देखने को मिली है। मार्च 2022 में विधायक बने ऋषि त्रिपाठी ने न सिर्फ विकास को प्राथमिकता दी, बल्कि राजनीति में सादगी, सहजता और सकारात्मक सोच की नई मिसाल भी पेश की। यही वजह है कि आज उनके कामों की चर्चा केवल समर्थकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी खेमे के लोग भी उनकी कार्यशैली की सराहना करते नजर आ रहे हैं।
विधायक बनने के बाद उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और राजनीतिक द्वेष से ऊपर उठकर क्षेत्र के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने खुद को एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया, जो जनता के बीच रहता है, उनकी समस्याओं को सुनता है और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहता है। क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम करते हुए उन्होंने विकास को जमीन पर उतारने की कोशिश की। चर्चित रोहिण बैराज, सोनौली बॉर्डर का इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, सेमराहवा का पुल, सोनौली स्थित मां कोटही माता मंदिर, जनजातीय विद्यालय, फायर स्टेशन, डंडा पुल, रोडवेज डिपो और गांव-गांव में सड़कों व हाईमास्ट लाइट जैसी योजनाएं उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जा रही हैं।राजनीतिक दृष्टि से देखें तो जहां एक ओर अमरमणि त्रिपाठी और मुन्ना सिंह जैसे दिग्गज नेता वर्षों से आपसी राजनीतिक टकराव और तीखे बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऋषि त्रिपाठी ने पूरी तरह अलग राह अपनाई। उन्होंने व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से दूरी बनाकर केवल विकास और कार्यों पर फोकस रखा। इसका असर अब साफ तौर पर क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। प्रबुद्ध वर्ग से लेकर आम नागरिक तक उनके कामों की चर्चा कर रहे हैं। लोगों के बीच यह धारणा तेजी से मजबूत हुई है कि ऋषि त्रिपाठी “कहने से ज्यादा करने में विश्वास रखने वाले नेता” हैं।
जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, नौतनवा की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ पुराने नेताओं का अनुभव और उनकी पकड़ है, तो दूसरी तरफ ऋषि त्रिपाठी का चार वर्षों का कार्यकाल और जनता से सीधा जुड़ाव सब पर भारी पड़ रहा है। क्षेत्र के धुरंधर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल व्यक्तियों के बीच मुकाबला नहीं होगा, बल्कि यह कार्यशैली, सोच और विकास मॉडल की भी लड़ाई होगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस पर अपना भरोसा जताती है।
महाराजगंज— उत्तर प्रदेश।


