टूटी सीढ़ी, थमी सांसें: 15 घंटे टंकी पर जिंदगी से जंग, एक मासूम की मौत

टूटी सीढ़ी, थमी सांसें: 15 घंटे टंकी पर जिंदगी से जंग, एक मासूम की मौत
आई एन न्यूज सिद्धार्थ नगर डेस्क:
कांशीराम आवास के लिए शनिवार का दिन ऐसा मनहूस साबित हुआ, जिसे लोग लंबे समय तक भूल नहीं पाएंगे। बच्चों की मासूम मस्ती कुछ ही पलों में चीख-पुकार और मातम में बदल गई, जब पानी की टंकी की जर्जर सीढ़ी अचानक टूटकर गिर पड़ी।
दोपहर करीब 2 बजे टंकी पर चढ़े पांच बच्चों में से तीन नीचे आ गिरे। इनमें एक मासूम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो बच्चे गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
लेकिन इस हादसे का सबसे भयावह दृश्य अभी बाकी था। दो किशोर—पवन और कल्लू—टंकी के ऊपर ही फंस गए। नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं, चारों ओर डर, और नीचे खड़े अपनों की बेबस निगाहें… समय जैसे थम गया था।
शाम होते-होते (एसडीआरएफ) की टीम गोरखपुर से पहुंची, लेकिन खराब रास्ता और हल्की बारिश रेस्क्यू में बाधा बन गई। हर बीतता घंटा परिजनों के दिलों की धड़कन बढ़ा रहा था।
रात गहराती गई, लेकिन टंकी पर फंसे दोनों किशोरों की आंखों में नींद नहीं थी। नीचे खड़े मां-बाप की आंखों में आंसू थे, और जुबां पर सिर्फ एक दुआ—“बस हमारे बच्चे सुरक्षित उतर आएं…”स्थानीय लोग पूरी रात आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे—“डरो मत, हम यहीं हैं…”
करीब 15 घंटे बाद, रविवार सुबह 5 बजे आसमान से उम्मीद उतरी। हेलिकॉप्टर की आवाज सुनते ही नीचे खड़े लोगों की सांसें थम गईं। कुछ ही देर में एक-एक कर दोनों किशोरों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
जैसे ही दोनों जमीन पर पहुंचे, वहां मौजूद हर आंख नम थी—कुछ आंसुओं में खुशी थी, तो कुछ उस मासूम के लिए, जो अब कभी घर नहीं लौटेगा।
मौके पर मौजूद जिलाधिकारी शिवसरणप्पा जी एन और अन्य अधिकारियों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह सवाल अब भी गूंज रहा है—
अगर सीढ़ी मजबूत होती, तो क्या आज एक घर उजड़ता?
(सिद्धार्थ नगर ब्यूरो)


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