और वो खुद को न जलाते तो क्या करते – – – गुड्डू खान नौतनवा

और वो खुद को न जलाते तो क्या करते – – – – गुड्डू खान नौतनवा 

स्वतन्त्रता दिवश के राष्ट्रीय पर्व पर सभी भारत वासियों को बहुत-बहुत बधाई देते हुए नौतनवा  के पुर्व चेयर मैन गुड्डू खान निम्न संस्थानो मे ध्वजारोहण किया । नगरपालिका कार्यालय नौतनवा- गोर्खा भूतपूर्व सैनिक स्कूल -मदरसा अरविया सेराजुलुलूम – अगापे मिशन जूनियर हाईस्कूल – स्वामी विवेकानन्द सरस्वती शिशु मंदिर,नहर रोड़ -मदरसा गौसिया बरकतुल उलूम,- मदरसा आयशा सिद्धिका,
नौ- डायनमिक पब्लिक स्कूल,पूरैनिहा,- धर्मादेवी कन्या जूनियर हाई स्कूल, परसासुमाली,
ग्यारह- प0 रामबली मिश्र विद्यालय, चडलहा, उन्होने कहाँ
अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं,सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नही,,
ये देशभक्ति लाइने आज गुड्डू खान ने स्वतंत्रता दिवश पर नगरपालिका कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद कहा और सभी भारत वासियों को इस राष्ट्रीय पर्व की बधाई दिए,उसके बाद उन्होंने मदरसा अरविया सेराजुलुलूम, मदरसा आयशा सिद्धिका, अगापे मिशन जूनियर हाईस्कूल,स्वामी विवेकानन्द,मदरसा गौसिया बरकतुल उलूम,गोर्खा भूत पूर्व सैनिक स्कूल आदि संस्थाओं में ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को सलामी दिए और गोर्खा भूत पूर्व सैनिक स्कूल मे पौधा रोपण किये।
अपने देश भक्ति सम्बोधन में श्री खान ने कहा कि”आज हमारा देश स्वतंत्रता दिवश का जश्न मना रहा है पूरे देश में आज देशभक्ति की बयार बह रही है हर स्कूल,कालेज,और संस्थाओं में झंडारोहण और देशभक्ति गीतों की धूम मची हुई है हर तरफ हर्षोउल्लाश का माहौल है लोग देश की आजादी का जश्न अपने-अपने तरीके से मनाने में ब्यस्त है इस दिन हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हम आजादी की कीमत को पहचानें तथा उसकी रक्षा करें तथा निजी स्वार्थों को त्यागकर परस्पर प्रेम-भाव से रहें।आज जिस आजादी का जश्न हम मना रहे है वह आजादी हमें लाखों लोगो के वलिदानो से मिली है हमारे पुर्वजो व स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस आजादी की कल्पना किये थे उसमे न जातिवाद था,न भाषावाद था,न क्षेत्रवाद था,न साम्प्रदायिक्ता था और न ही धर्म का बंटवारा होता था।अगर कल्पना था तो वो था एक भारतीय होने की,तो आइये उन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनो को साकार करने के लिए मिलजुलकर एक होकर उनके सपनो को पूरा करे और एक संगठित भारत का पुनर्निर्माण करे ताकि देश की स्वाधीनता, एकता एवं अखण्डता की रक्षा की जा सके।हमें ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जिसके कारण देश में एकता की जगह अनेकता फैले,हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए तथा देश की उन्नति के लिए अपने कर्त्तव्य का पालन निःश्वार्थ भाव से करना चाहिए,,अंत में श्री खान ने उन बीर सपूतो के सम्मान में दो लाइने कहे जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को इस लिए न्योछावर कर दिए ताकि आने वाली पीढ़ी ख़ुशी ख़ुशी और आजादी से अपना जीवन अपने स्तर से जी सके,
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  वो दर्द से हाथ न मिलाते तो क्या करते,
  वो खून के आंशू न बहाते तो क्या करते,
  हिंदुस्तान ने जो मांगी उनसे आजादी की रोशनी ,
  वो खुद को न जलाते तो क्या करते,
 भारत कि आजादी के जश्न में सुधीर त्यागी (कस्टम सुपरिटेंडेंट),देवेश कुमार गुप्त (sdm), रामायण यादव(SO),रमाशंकर सिंह (प्रधान लिपिक),संतोष श्रीवा0,संजय श्रीवा0, रविकांत वर्मा,विंद्याचल सिंह, अंनवारुलहक़, समीउल्लाह,अब्दुल हक, मिस्टर जोजो,राम नारायण गौतम, राजेन्द्र जाय0,शाहनवाज खान,राजेश ब्वाएड,धीरेंद्र सागर,राज कुमार यादव, राजकुमार गौड़, सद्दाम अहमद ,आदि कई सम्मानित नागरिक गण,कर्मचारी गण, अधिकारी गण, अध्यापक,अध्यापिकाएं और छात्र,छात्राये शामिल रहे,

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