कुरहवां कांड़ : वाह! रे लोकतंत्र, नौनिहाल दे रहे धरना, जिम्मेदार बने मूक दर्शक
कुरहवां कांड़ : वाह! रे लोकतंत्र, नौनिहाल दे रहे धरना, जिम्मेदार बने मूक दर्शक
आई एन न्यूज नौतनवा ( धर्मेंद्र चौधरी):कहते हैं कि भारत एक आदर्श संवैधानिक व लोकतंत्रिक देश है। यहां मानवता सर्वोपरि है।
कार्य पालिका, न्यायपालिका व विधायिका से लेकर आम जनता के अधिकार भी संविधान में बड़े ही आदर्श अंदाज में लिपिबद्ध हैं।
जब कुछ़ इतना आदर्श चल ही रहा है, तो ऐसा क्या हुआ कि दर्जन भर की संख्या में १ वर्ष से १२ वर्ष की उम्र के बच्चे भी, जिन्हें लाड़-प्यार की भाषा में नौनिहाल कहा जाता है, वे भी धरना दे रहे हैं। 
क्या आप बच्चों की मनोव्यथा समझ सकतें हैं? कि उनके दिमाग में क्या चल रहा होगा?
अबोध बच्चे सियासत व तंत्र के बिगड़े स्वरुप का तमाशा देख रहे। वह बड़ों के इस खेल का लुफ्त ले रहे हैं, हस्तप्रभ है कि ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,”बड़े लोग ऐसे खेलते हैं? जब हम बड़े होंगे तब हम भी इस वाले खेल को खेलेंगे,,कितना मज़ा आ रहा लोग आते हैं फोट़ो खींच कर ले जाते,,मोबाइल से और कैमरे से भी। उनके साथ धरने पर बैठ़े लोग कभी-कभी दोनों हाथ उठ़ाते हैं- नारा भी लगाते हैं।
एक साल भर का बच्चा भी धरने पर बैठ़ा है, समय समय पर बिस्कुट़ खाने को मिल रहा है,,,,,,,,,”
कुछ़ ऐसी ही मानवता को शर्मसार करने वाली एक विकृत तस्वीर नौतनवा तहसील परिसर में सजी हुई।
कुरहवां गांव में ७ जनवरी को एसएसबी जवानों की गोली से कमलेश पासवान नामक व्यक्ति की मौत हो गयी। मुकदमे बाजी हुई, मगर हत्या करने वालों को पुलिस करीब चार सप्ताह तक नहीं गिरफ्तार कर पाई है। मृतक कमलेश का पूरा कुनबा, उसकी पत्नी व दो मासूम बच्चे अब धरने पर बैठ़े हैं। उस धरने में आलोक,शालिनी, शिल्पा, रियांश, अंकित,सोनी, रोशनी, महिमा व शैल सहित करीब दर्जन भर मासूम बच्चें भी हैं।
धरना देने वालों की मांग भी वाजिब है। हत्या हुई है,तो हत्यारे भी गिरफ्तार हों।
,
,अब बताईए यह लोकतंत्र है। अगर यही लोकतंत्र है आदर्श लोक तंत्र है,,,तो बजाइए ताली,,और गर्व से कहिये कि हम भारत देश के वासी हैं।





