सोनौली बार्डर पर गजब का खेल है भाई !
सोनौली बार्डर पर गज़ब का खेल है भाई!
नशेडियो के कंधे-सहारे वर्क आउट़ की वाहवाही?
आई एन न्यूज ब्युरो सोनौली: सोनौली सीमा व आसपास के क्षेत्र में नशा कारोबार चरम पर है। स्मैक जहां तहां बेची जा रही। नेपाली से लेकर भारतीय युवा वर्ग नशे के गहरे भंवर में फंस कर अपनी ईहलीला समाप्त कर रहे हैं।
,,,समस्या दिन प्रतिदिन खतरनाक होती जा रही है। नशे का संजाल भी हाईलेवल तक विस्तारित बताया जा रहा है। ,,लेकिन इस पर सरकारी विभागों व सुरक्षा एजेंसियों की नक़ेल लगाने की कवायद् देखी जाय तो,,
दस ग्राम स्मैक के साथ नेपाली युवक गिरफ्तार, २५ ग्राम स्मैक के साथ फलां पकड़ाया, ३० ग्राम स्मैक के साथ ढ़ेमाका दबोचा गया,,,इस तरह की शीर्षकीय समाचार सुर्खियों में आ रहे हैं। दसियों साल से!
हां इधर यह शीर्षक कुछ़ बदलाव वाले से लग रहे हैं,,जैसे की दस लाख की स्मैक के साथ,,या बीस लाख की स्मैक के साथ,,फलाना-ढ़ेमका,,,नेपाली या भारत निवासी गिरफ्तार!
स्मैक की मात्रा चंद ग्राम ही रहती, कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार वाली लग गयी। पकड़े गये व्यक्ति के साथ फोट़ो- फाट़ो हो गया, समाचार का शीर्षक बन गया,फर्द भी लिख ली गयी, खबर की कटिंग का कलेक्शन हो ही जायेगा। जो किसी विभागीय बैठ़क में स्क्रीन पर चला दिया जायेगा। ताली पे ताली बजेगी,,,गुड वर्क,,प्रमोशन का या पुरस्कार पाने का रास्ता बन ही जायेगा। अच्छ़ा है।
अब इस पूरे बने बनाये गये सेट़ के उस पहलू पर आये, जिस पर इतनी बड़ी फर्जी पिक्चर बना दी गयी।
वह पहलू है पकड़ा गया व्यक्ति या युवक।
,,,,सोनौली व आसपास से स्मैक के साथ पकड़े जाने वाले अधिकतर यूजर (नशा का प्रयोग) करने वाले लती या यूं कहे कि नशेड़ी होते हैं।
गुमराह व नशे के आदी हो चुके युवकों को सुधार गृह,इलाज व मनोवैज्ञानिक मदद के बजाय ,,जेल भेज़ा जा रहा है। यह कितना सही है। आये दिन नशेड़ी ही पकड़े जा रहे हैं,,सरगना को क्यों नहीं दबोच़ा जा रहा है? या फिर यही नशेड़ी ही स्मैक कारोबार के सरगना हैं?
क्या पकड़े जाने के बाद पूछ़ताछ में युवक यह बताते हैं कि वह स्मैक की पुड़िया हवा में उड़ती उड़ती मिल गयी? या फिर किस मकान या व्यक्ति से लेकर आये, कितने रुपये में ? (अंतरराष्ट्रीय बाजार वाली कीमत ?) में ये पूछ़ताछ ही नहीं हो पाती?
,,क्या यह ग़जब का खेल तो नहीं चल रहा है?





