सुलग रहे गुजरात में, झुलस रहे परदेशी

सुलग रहे गुजरात में, झुलस रहे परदेशी

सुलग रहे गुजरात में, झुलस रहे परदेशीसुलग रहे गुजरात में, झुलस रहे परदेशी

(रिजवान खान)
आई एन न्यूज गुजरात डेस्क
जिस तरह से इस समय गुजरात मे उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीब मज़दूरों पर कुछ गुजराती सितम ढा रहे हैं वह अपनी आत्मा से पूछें, कि क्या वह गरीबों को मार कर उनका दिल दुखा कर सही कर रहे हैं ।
आखिर इनका कुसूर क्या है। क्या किसी एक व्यक्ति की की हुई गलती का जिम्मेदार उसका पूरा समाज होता है । नहीं , एक युवक ने मात्र चौदह माह की बच्ची के साथ हैवानियत की है । बिल्कुल वह अपराधी है ।
और ऐसे अपराधी के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है । ऐसे अपराधी को तो जितनी भी सजा दी जाए कम है ।
हम मांग करते हैं कि इस अपराध को अंजाम देने वाले को सख्त से सख्त सजा दी जाए । लेकिन क्या इस एक को सजा देने के लिए हम उसके पूरे समाज को प्रताड़ित करेंगे ।
यह कैसा इंसाफ है । मान लीजिए अगर यही अपराध किसी गुजराती युवक ने किया होता तब क्या करते । तब आप किसको गुजरात से भगाते ।
क्या परदेशीयों के चले जाने से गुजरात मे अपराध बंद हो जायेगा । क्या अपराधी सिर्फ यूपी और बिहार के गरीब लोग ही हैं । गुजरात के लोग कोई अपराध नहीं करते । गुजरात के लोगों को यह भूलना नहीं चाहिए ।
जरा उनके बारे मे भी सोचिए जो आपके गुजरात के ही सेठ हैं ।जिनकी अरबों खरबों रूपये की कंपनियाँ इन्ही गरीब मजदूरों से ही चलती हैं । मजदूरों के चले जाने के बाद उनका क्या होगा । जब कोई मजदूर नहीं रहेगा तो कौन काम करेगा । इन गरीबों के जाने से उन बड़ी बड़ी कम्पनीयों पर भी बुरा असर पड़ेगा
यही नहीं पूरे गुजरात के अर्थ व्यवस्था पर असर पड़ेगा ।
और हर गुजराती पर इसका असर पड़ेगा । इसका जिम्मेदार कौन होगा । आप होंगे । जो लोग मजदूरों को भगा रहे हैं वह होंगे ।
इस पर हम सबको विचार करना चाहिए।

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