अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय में तारीख बढ़ने से बढ़ी आम जन में निराशा
आई एन न्यूज लखनऊ ब्यूरो। अयोध्या के विवादित धर्मस्थल के मुकदमे में शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में 10 जनवरी को एक और तारीख पड़ जाने के बावजूद लोगों को पूरी उम्मीद है कि मामला हल होने की राह में आगे बढ़ रहा है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में वकालत करने वाले रंजन कहते हैं कि यह सही है कि देश के प्रमुख मुकदमों में से अयोध्या मामला एक है। विभिन्न अदालतों में 69 साल से लम्बित है। इस सबके बावजूद वह कहते हैं कि यह मामला उच्चतम न्यायालय में फैसले की ओर बढ़ रहा है। अब इस मामले को अधिक दिनों तक नहीं लटकाया जा सकेगा।
अयोध्या (फैजाबाद) में वकालत करने वाले चन्द्रदेव शुक्ल कहते हैं कि न्यायालय का अपना सिस्टम है। उसी सिस्टम के तहत न्यायालय फैसला देते है। रामजन्मभूमि मामले में मुकदमा अब सही रास्ते पर है। पूरी उम्मीद है कि इस मामले में निर्णय जल्दी आयेगा। उन्होंने कहा कि तमाम अवरोधों के बावजूद उच्चतम न्यायालय ने फारूकी की याचिका पर निर्णय सुना दिया। फारूकी की याचिका की वजह से भी इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही थी। फारूकी की याचिका का निस्तारण हो जाने के बाद अब रास्ता साफ हो गया है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस मामले के टाइटल सूट में फैसला जल्द आयेगा।
शुक्ल कहते हैं कि स्थानीय लोग इस मामले से कितना परेशान रहते हैं, यह बाहर के लोग शायद ही समझ सकें। स्थानीय हिन्दू और मुसलमान दोनों चाहते हैं कि इसका हल यदि कल होना हो तो आज हो जाये और आज होना है तो अभी हो जाये लेकिन सिर्फ चाहने से कुछ नहीं होता। उच्चतम न्यायालय में मामला चल रहा है। लोगों को धैर्य के साथ फैसले का इन्तजार करना चाहिये।
अयोध्या (फैजाबाद) के वरिष्ठ वकील कल्पेन्द्र सिंह कहते हैं कि हम लोग मान बैठे थे कि इस मामले का हल ही नहीं होगा। मुकदमा ऐसे ही चलता रहेगा लेकिन मुकदमा अब ऐसे मुकाम पर पहुंच रहा है, जहां से निर्णय को अधिक दिनों तक नहीं टाला जा सकता है।
सिंह ने कहा कि जो भी इस मामले का जल्दी हल चाहते हैं, उन्हें समझना चाहिये कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की विशेष पूर्णपीठ ने 30 सितम्बर 2010 को फैसला सुनाया ही नहींं। उनका कहना था कि उच्चतम न्यायालय हो सकता है कि 10 जनवरी को विशेष पूर्णपीठ का गठन कर दे। विशेष पूर्ण पीठ के गठन के बाद इस ऐतिहासिक मुकदमे का फैसला भी सही समय पर आ जायेगा।
इससे इतर, राम मंदिर निर्माण के प्रबल समर्थक अंशुमालि कहते हैं कि इस मुकदमे की गंभीरता और लोगों का जुड़ाव देखते हुये न्यायालय को मुकदमे की प्रतिदिन सुनवाई कर निर्णय जल्दी सुनाना चाहिये। उनका कहना था कि मामले को जितना लटकाया जायेगा, उतना ही जटिल होता जायेगा।





