गुरु पूर्णिमा कथा ज्ञान : गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं–स्वामी आत्मानन्द महाराज जी

गुरु पूर्णिमा कथा ज्ञान : गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं–स्वामी आत्मानन्द महाराज जी
इंडो नेपाल न्यूज़ सोनौली डेस्क:
गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं जैसा हम कर्म करते हैं वैसा ही फलीभूत होता, भगवान ही गुरु है इसीलिए गुरु को भगवान से ऊपर माना गया है।
मंगलवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर नगर पंचायत सोनौली के चंचाई माता मंदिर पर कथा कार्यक्रम में अपने अमृतवाणी का वर्षा करते हुए माता चंचाई मंदिर के महंत बाबा स्वामी आत्मानन्द महाराज जी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम गुरु की पूजा करते हैं। गुरु कोई साधारण मनुष्य नहीं होता है। गुरु ही भगवान का रूप माना जाता है। हमेशा गुरु की हमें बंदना करनी चाहिए, गुरु के ज्ञान से ही हम अंधेरे को चीरकर ज्ञान का प्रकाश प्राप्त करते हैं। गुरु के बिना हमें कोई ज्ञान का रास्ता दिखाने वाला नहीं होता है । आज गुरु पूर्णिमा है इसलिए हमें आज गुरु की महत्ता को जाना चाहिए। उन्होंने एक दोहा के माध्यम से कहा कि काम, क्रोध के दो पहाड़ खड़े हैं और अहंकार रूपी नदियों के रास्ते से होकर गुजरना है। ऐसे में हमें गुरु के सिवा कोई दूसरा व्यक्ति अहंकार रूपी नदी से पार नहीं लगा सकता । अपने जीवन में हर व्यक्ति को गुरु बनाना चाहिए, गुरु ऐसा हो जो काम क्रोध लोभ मोह का त्याग कर चुका हो।
उन्होंने श्री राम नाम की बड़ी महत्व को बताते हुए कहा कि हम सभी को कुतर्कों की गांठ समाप्त करना होगा तभी राम नाम की महत्ता को समझ पाएंगे। गुरु के बाड़ी का रसपान करें सभी समस्याओं का समाधान स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित गुरू ज्ञान कथा के मुख्य यजमान सुधीर त्रिपाठी अध्यक्ष नगर पंचायत सोनौली प्रतिनिधि रहे।
इस मौके पर उद्योग व्यापार मंडल नौतनवा के अध्यक्ष राधेश्याम सिंह उद्योग व्यापार मंडल सुनौली के अध्यक्ष बबलू सिंह, प्रेम नारायण त्रिपाठी, हरीश चंद्र पाठक, पुनवासी, राम अशीष तिवारी, अजय गुप्ता, पप्पू खान, अमित जायसवाल, प्रदीप नायक, बेचन प्रसाद, राजेश पांडे, विनय यादव, ऋषि जयसवाल, अमित जयसवाल, कृष्ण मुरारी मद्धेशिया, हरिओम जायसवाल, परमानंद तिवारी, अशर्फीलाल, परशुराम, मंगल प्रसाद, गायत्री देवी, शांति देवी सहित कई दर्जन महिला पुरुष भक्तगण मौजूद रहे।
कथा ज्ञान के बाद एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया जिसमें सभी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।





