सामंतवादीयों से सिसवा को मुक्त कराने के लिये राजनीति में आया हूँ—कामरेड हरिश्चन्द्र जायसवाल
सिसवा विधान सभा से लगातार चौथी बार चुनावी रण में कूदे भाकपा माले के प्रत्याशी कामरेड हरिश्चन्द्र जायसवाल ने मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के उपरान्त विशेष वार्ता के दौरान कहा कि गांव गरीब किसान मजदूरों के हितों के लिये संघर्ष ही मेरा ऐजेंडा है।
मूल रुप से सिसवां विधान सभा के ग्राम जमुई पण्डित निवासी रमाकान्त जायसवाल के चार पुत्रों में सबसे छोटे हरिश्चन्द्र जायसवाल ने गोरखपुर विश्वविधालय से बीए पास करने के उपरान्त परस्नातक की पढाई के दौरान ही छात्र राजनीति में सक्रिय हुये और 1989 से कम्युनिस्ट धारा से जुडते हुये छात्र संगठन के लिये काम किया।इसके उपरान्त वर्ष 2002 में भाकपा माले ज्वाईन किया और महराजगंज में माले की जमीन तैयार करते हुये 2002 में पहली बार विधान सभा का चुनाव लडे।वर्ष 2007 व 2012 में भी माले से चुनाव लडे लेकिन हार का सामना करना पडा।इस दौरान गरीब किसानों मजदूरों एवं शोषितों की हक हकूत के लिये जब तब सडक पर उतर कर संघर्ष किया।उनका कहना है कि सिसवा को विकास के नाम ठगने वाले सामंतवादीयों से सिसवा को मुक्त कराने के लिये राजनीति में आया हूँ।अवसर मिला तो अपने संघर्ष दम पर सिसवां को विकास के नये रास्ते पर ले जाते हुये सिसवां के विभिन्न फार्महाउसों में छिपा कर रखी गयी हजारों एडक बेनामी सम्पतियों को गरीबों में बटवाकर ही दम लूंगा।





