बाबा रामदेव पर नेपाली मिडिया का हाय तौबा –
नेपाल मे अखबार ’कान्तिपुर’ का आरोप है कि नेपाल के कानून अनुसार मुनाफा वितरण नही करने वाली कम्पनी विदेशी नागरिक दर्ता नही करा सकते । जबकि बाबा रामदेव कानून की अनदेखी कर चार भारतीय और एक नेपाली नागरिक के नाम पर कंपनी पंजीकृत कराया, जो की गैरकानूनी है । ‘कान्तिपुर’ का दावा है कि उक्त कम्पनी गैरकानूनी तरीके से दर्ता होने की जानकारी ‘कान्तिपुर’ को २०६९ साल में ही पत्ता लग गया था, फिर अब तक ‘कान्तिपुर’ ने उजागर क्यों नही किया था ?
बाबा रामदेव को जड़ीबुटी खेती तथा आयुर्वेद शिक्षण अस्पताल निमार्ण के लिए नेपाल संस्कृत विश्व विद्यालय ने २ सौ बिघा जमीन ४० वर्ष के लिए किराए में देने की घोषणा की है । विश्वबिद्यालय के उपकुलपति कुलप्रसाद कोइराला तथा उच्च कर्मचारी के अगुवाई में जÞमीन भाड़ा में देने के घोषणा पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी विरोध में आए । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ ने खबर दिया की, स्थानीय स्तर पर विवाद होने के बाद इसका फाइल प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल को भेजा गया । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ स्रोत के अनुसार बाबा रामदेव प्रधानमन्त्री को प्रभाव में लेकर निर्णय करा रहे है । क्या ऐसा निर्णय होने से कुछ गलत हुआ ऐसा कहा जा सकता है ?
‘कान्तिपुर’ और ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ के द्वारा लगाए आरोप गंभीर है, इसकी पड़ताल करने के लिए ‘हिमालिनी’ ने बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के बारे में जानकारी जुटाने और उसे खंगालने का बीड़ा उठाया । बाबा रामदेव, वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव जन्म २६ दिसम्बर १९६५, हरियाणा, भारत हैं । सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव में योग और संस्कृत की शिक्षा ली । योग गुरु बाबा रामदेव ने कही ।
( साभार मुरलीमनोहर तिवारी , बीरगंज , ७)





