अयोध्या ढांचा प्रकरण: सरहदी क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट, नौतनवा में पुलिस का पैदल मार्च

अयोध्या ढांचा प्रकरण: सरहदी क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट, नौतनवा में पुलिस का पैदल मार्च

अयोध्या ढांचा प्रकरण: सरहदी क्षेत्रों में प्रशासन अलर्ट, नौतनवा में पुलिस का पैदल मार्च

अयोध्या विध्वंस मामले में बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत ने फैसला सुना दिया , लालकृष्ण आडवाणी समेत सभी 32 आरोपित बरी।

आई एन न्यूज नौतनवा डेस्क;
अयोध्या विध्वंस मामले में बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया जिसके मद्देनजर भारत नेपाल के सरहदी क्षेत्रों समेत पूरे जनपद में प्रशासन एक्शन में रहा इसी क्रम में संवेदनशील कस्बा नौतनवा में एसडीएम और सीओ के नेतृत्व में पूरे नगर में पुलिस ने पैदल मार्च कर लोगों को शांति और सुरक्षा का एहसास दिलाया।
पैदल मार्च के दौरान एसडीम नौतनवा प्रमोद कुमार क्षेत्राधिकारी नौतनवा थानाध्यक्ष नौतनवा सहित बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रहा।
बता दे की देश की राजनीतिक दिशा को परिवर्तित कर देने वाले अयोध्या विध्वंस केस में आज बुधवार को सीबीआइ की विशेष अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया। 28 साल से चल रहे इस मुकदमे पर विशेष जज एसके यादव ने अपने कार्यकाल का अंतिम फैसला सुनाते हुए लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, महंत नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया। विशेष जज ने कहा कि तस्वीरों से किसी को आरोपित नहीं ठहराया जा सकता है। अयोध्या विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था। घटना के प्रबल साक्ष्य नही हैं। सिर्फ तस्वीरों से किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता है।
छह दिसंबर, 1992 को अयोध्या में हुए ढांचा विध्वंस केस में 32 आरोपितों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सीबीआइ कोई निश्चयात्मक सुबूत नहीं पेश कर सकी। विध्वंस के पीछे कोई साजिश नहीं रची गई और लोगों का आक्रोश स्वत: स्फूर्त था। इस मामले के मुख्य आरोपितों में एक स्व. अशोक सिंहल को कोर्ट ने यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी कि वह तो खुद कारसेवकों को विध्वंस से रोक रहे थे, क्योंकि वहां भगवान की मूर्तियां रखी हुई थीं।

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