नेपाल: सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़का जनजी आंदोलन: संसद में घुसे प्रदर्शनकारी, अब तक 6 की मौत
नेपाल: सोशल मीडिया बैन के खिलाफ भड़का जीनजी आंदोलन: संसद में घुसे प्रदर्शनकारी, अब तक 6 की मौत
काठमांडू, नेपाल (8 सितंबर 2025):
नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार द्वारा लगाए गए बैन के खिलाफ युवाओं का गुस्सा अब चरम पर पहुंच गया है। सोमवार को राजधानी काठमांडू सहित देश के कई प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। आंदोलन के दौरान हालात उस समय बेकाबू हो गए जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में घुसपैठ कर ली। पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ झड़पें हुईं, जिसमें अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है।
केएमसी अस्पताल में एक और मौत, मरने वालों की संख्या हुई 6
काठमांडू मेडिकल कॉलेज (केएमसी), सिनामंगल में सोमवार देर रात एक और घायल प्रदर्शनकारी की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन प्रमुख नारायण प्रसाद दाहाल ने बताया कि मृतक उन प्रदर्शनकारियों में शामिल था जो हिंसा के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसके साथ ही जनजी (Gen-Z) आंदोलन के दौरान मरने वालों की कुल संख्या 6 हो गई है।
सोशल मीडिया पर बैन ने भड़काया आंदोलन
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X (पूर्व में ट्विटर) सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का तर्क है कि इन कंपनियों ने नेपाल में अपना दफ्तर नहीं खोला है और न ही कोई स्थानीय रजिस्ट्रेशन कराया है, जिससे देश में डिजिटल गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण मुश्किल हो रहा है।
सरकार की इस कार्रवाई को लेकर खासकर युवा वर्ग में भारी नाराजगी देखी जा रही है, जो इन प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। प्रदर्शन कर रहे युवा खुद को “Gen-Z” आंदोलन का हिस्सा बता रहे हैं और सरकार से तुरंत सोशल मीडिया बैन हटाने की मांग कर रहे हैं।
सरकार की चेतावनी: ‘प्रदर्शन की कीमत चुकानी पड़ेगी’
प्रधानमंत्री ओली ने आंदोलन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को “प्रदर्शन की कीमत चुकानी” पड़ेगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। ओली सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियां तब तक नेपाल में सेवाएं नहीं दे सकतीं जब तक वे देश में अपना ऑफिस नहीं खोलतीं और आधिकारिक रूप से रजिस्ट्रेशन नहीं करातीं।
अब तक किन-किन ऐप्स ने कराया रजिस्ट्रेशन?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक सिर्फ टिकटॉक, वाइबर, निम्बज, विटक और पोपो लाइव जैसी कंपनियों ने नेपाल के कंपनी रजिस्ट्रार कार्यालय में अपना पंजीकरण कराया है। फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसी बड़ी कंपनियां अब तक बिना स्थानीय पंजीकरण के ही नेपाल में अपनी सेवाएं दे रही थीं, जिसे अब अवैध करार दिया गया है।
Gen-Z आंदोलन: सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, पहचान की लड़ाई Gen-Z यानी जेनरेशन Z उन लोगों की पीढ़ी है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं। यह पीढ़ी डिजिटल युग में पली-बढ़ी है और सोशल मीडिया, ऑनलाइन कंटेंट और टेक्नोलॉजी का हिस्सा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया की बहाली की मांग नहीं है, बल्कि एक पीढ़ी की पहचान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भविष्य को लेकर हो रहे फैसलों में भागीदारी की मांग है।
नेपाल इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रहा है, जहां सरकार की डिजिटल नीति और युवा पीढ़ी की स्वतंत्रता के बीच टकराव गहराता जा रहा है। यदि जल्द ही संवाद और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
(समाचार विभिन्न स्रोतो से लिए गए हैं )





