सोनौली में मेडिकल स्टोरो पर की गयी छापेमारी से सवालों में घिरे अधिकारी
सोनौली में की गयी छापेमारी से सवालों में घिरे अधिकारी
– दलबल को कैसे चकमा दे गये दर्जनों मेडिकल स्टोर संचालक?
आई न्यूज, महराजगंज डेस्क:
भारत-नेपाल सीमा के सोनौली कस्बा में स्थानीय और जिलास्तर के अधिकारियों ने शुक्रवार को जिस तरह मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की, उससे तो यही प्रतीत हुआ कि कुछ ख़ास तथा बड़ी बरामदगी होकर रहेगी। प्रशासनिक अमले ने जिस तत्परता तथा रौले से छापेमारी की, उससे सोनौली के आमजनों में घंटों अफरा-तफरी और कौतुहल का माहौल रहा। छापेमारी के दौरान सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दर्जनों मेडिकल स्टोर संचालक आसानी से अपने दुकानों के शटर गिराकर चलते बने। जैसे कि सबकुछ प्री प्लांट था। दो-चार मेडिकल स्टोर खुले मिले। जिनकी जांच करने के बाद जांच अफसरानों का यह बयान आया कि सब कुछ ठीक है, कोई फाल्ट नहीं मिला।
इतनी व्यापक छापेमारी के बाद नतीजा “ढाक के तीन पात” होने से आमजनों में तरह तरह की चर्चाएं शुरु हो गयी हैं। कई लोगों के जुबान से यह भी निकले कि अधिकारी कार्यवाही के लिये नहीं बल्कि अपनी सेटिंग के चक्कर में आये थे।
ऐसे आरोप भी वाजिब ही लगे, क्योंकि छापेमारी के दल पर नजर डालें। तो वह दंगा नियंत्रक अभ्यास दल से भी दो या तीन गुना अधिक थी।
उपजिलाधिकारी नौतनवा आलोक कुमार के नेतृत्व तले, सहायक सीएमओ ए.पी लारी महराजगंज, ड्रग्स इंस्पेक्टर अशोक कुमार, तहसीलदार नौतनवा, क्षेत्राधिकारी नौतनवा लच्छीराम यादव, नौतनवा थाना प्रभारी बृजेश वर्मा, परसा मलिक पुलिस, सोनौली कोतवाली प्रभारी टी.पी.श्रीवास्तव समेत दो अन्य थाने की पुलिस फोर्स द्वारा छापेमारी। नतीजा सिफर। यानि यह कहावत कही जा सकती है कि ” नौ कै लकड़ी, नब्बे क खर्चा”!
एसडीएम नौतनवा ने पत्रकारों से बताया कि सोनौली के कुछ मेडिकल स्टोर से नशे के दवा की बिक्री तथा दवाओं को तस्करी के माध्यम से नेपाल भेजे जाने की शिकायतें मिल रही थी। जिसे पकड़ने के लिये छापेमारी की गयी है।
अब इस मामले में आम जन के जेहन में सवाल भी ठीक ठाक ही है, मसलन–
1- एसडीएम तो राजस्व मामलों के जानकार अधिकारी हैं। ऐसे में सहायक सीएमओ पीए लारी फ्रंट पर आकर कोई बयान क्यों नहीं दिये?
2- सोनौली में कोई सीएचसी, पीएचसी या एमबीबीएस चिकित्सक नहीं बैठता। फिर करीब तीन दर्जन मेडिकल स्टोर कैसे चल रहे हैं?
3- एसडीएम, सीओ व कोतवाल लगभग प्रतिदिन सोनौली जाते हैं। फिर उनकी निगाह पहले इन मेडिकल स्टोरों पर क्यों नहीं पड़ी?
4- इतने दल बल के बावजूद करीब दो दर्जन मेडिकल स्टोर संचालक अपनी दुकान पर बंद कर भाग निकलने में सफल रहे। यह हास्यास्पद है।
5- इतने बड़े दलबल को जब दो दर्जन मेडिकल स्टोर संचालक चकमा दे सकते हैं। तो सोचिये दो तीन कुख्यात बदमाश आ जाये तब क्या होगा।





