सुंदरीकरण के नाम पर मौत का गेट! मासूम की जान लेने वाले निर्माण की होगी जवाबदेही तय?
सुंदरीकरण के नाम पर मौत का गेट! मासूम की जान लेने वाले निर्माण की होगी जवाबदेही तय?
पोखरी का प्रवेश द्वार बना काल, 11 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत; डीएम ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति।
आई एन न्यूज सोनौली डेस्क: विकास कार्यों में लापरवाही और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। नौतनवां विकास खंड के ग्राम पंचायत शेष फरेन्दा में अमृत सरोवर के सुंदरीकरण के तहत बनाया गया प्रवेश द्वार (गेट) अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके मलबे में दबकर 11 वर्षीय मासूम विक्की यादव पुत्र वीरेंद्र यादव की मौत हो गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
शनिवार को हुए इस हादसे के दौरान विक्की पोखरी के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक गेट का हिस्सा टूटकर गिर पड़ा और बच्चा उसके नीचे दब गया। ग्रामीणों ने तत्काल मलबा हटाकर उसे बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मासूम की मौत की खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि सुंदरीकरण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई और घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया, जिसका खामियाजा एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य मजबूत और मानक के अनुरूप हुआ होता तो क्या यह हादसा होता?
वहीं ग्राम प्रधान महेंद्र यादव ने बताया कि यह गेट लगभग ढाई से तीन वर्ष पूर्व उनके कार्यकाल में बनाया गया था और निर्माण के समय इसकी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ समय पूर्व एक ट्रैक्टर की टक्कर से गेट क्षतिग्रस्त हो गया था। ट्रैक्टर चालक ने मरम्मत कराने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई जा सकी। प्रधान के अनुसार हादसे के समय कई बच्चे गेट पर लटककर झूला झूल रहे थे, तभी क्षतिग्रस्त हिस्सा गिर गया।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि गेट की स्थिति पहले से खराब थी तो उसे तत्काल हटाने या मरम्मत कराने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या संभावित खतरे को नजरअंदाज किया गया? ऐसे कई सवाल अब प्रशासनिक जांच के केंद्र में हैं।
सोनौली थानाध्यक्ष महेंद्र मिश्रा ने बताया कि परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है और वे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। बावजूद इसके पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और निर्माण कार्य से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम नौतनवां नवीन प्रसाद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता तथा जिला पंचायतराज अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। जिलाधिकारी ने समिति को तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि जांच में जिस किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आएगी, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब पूरे जिले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या एक मासूम की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर वास्तव में कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जवाबदेही तय होना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि उस मासूम के प्रति न्याय भी है, जिसकी जिंदगी एक ढहते हुए गेट के साथ हमेशा के लिए खत्म हो गई।
महाराजगंज— उत्तर प्रदेश।



