कुरहवां कांड़ : “टोपीटोपी- भाईभाई” के तमाशे से तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठ़े सवाल?
कुरहवां कांड़ : “टोपीटोपी- भाईभाई” के तमाशे से तंत्र की कार्यप्रणाली पर उठ़े सवाल?
आईएनन्यूज, नौतनवा (धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट)
नौतनवा थाना क्षेत्र के कुरहवां गांव में ७ जनवरी की शाम एसएसबी की गोली से कमलेश नामक व्यक्ति की मौत मामले में अब एक नया तमाशा शुरु होता नज़र आ रहा है। यह तमाशा ” ट़ोपी टोपी-भाईभाई” के तर्ज जैसा प्रतीत हो रहा है। जैसा कि लोग कह रहे हैं।
पुलिस अब आरोपी एसएसबी जवानों पर मेहरबानी के मुड़ में नज़र आ रही है। तभी तो घटना के १० दिन बीत जाने के बाद भी हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है।
,,यह क्या दर्शा रहा है?
क्या पुलिस आरोपियों की तलाश नहीं कर पा रही है? फिर घायल एसएसबी कर्मी कहां है? पुलिस मामले में लीपापोती कर रही?
,,,,ऐसे तमाम सवालों और हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सैकड़ों लोग बुधवार को सड़क पर उतर गये, मशाल जुलूस निकाला, न्याय की गुहार लगाई!
एक व्यक्ति की मौत हुई है!परिवार बेसहारा हुआ है! घटना कई गांवों में दहशत का पर्याय बनी है! ,,लोग तंत्र से आस रख़े हैं कि न्याय होगा।
,,लेकिन दस दिन बाद भी पुलिस केवल मुकदमा दर्ज का कोरम पूरा कर चुप्पी साधे है।
अब पूरे वाकये में एक दूसरे पहलू पर गौर करे तो “पुलिस” प्रदेश की भाजपा सरकार के नौकरशाही की “ट़ोपी” पहनी जांच एजेंसी है, तो मामले के आरोपी एसएसबी कर्मी केंद्र की भाजपा सरकार के नौकरशाही टोपी वाले हैं।,,
मतलब की यहां काफी कुछ़ उभयनिष्ठ़ है। भाईगिरी और बंधुता का पूरा मौका बन रहा है।
,,ठ़ीक है,,भाई बंदगी होनी चाहिए। लेकिन हत्या जैसे मामले में भाईबंधुता दिखाना और अपने हिस्से के काम में शिथिल हो जाना, तंत्र की विश्वसनियता को ड़गमगाने जैसा है। ,,और लोकतंत्र के लिये ख़तरनाक भी!
ग्रामीण व मृतक के परिजन कह रहे हैं कि मामले में “टोपीटोपी- भाई भाई” का तमाशा शुरु हो गया। वह इसका विरोध करेंगे और न्याय के लिये अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। हत्यारोपी जेल के सलाख़ों में जाएं।





