नेपाल मदरसा संघ की मांग, विम्स्टेक सम्मेलन में रोहिंग्या समस्या भी सुलझाई जाए

नेपाल मदरसा संघ की मांग, विम्स्टेक सम्मेलन में रोहिंग्या समस्या भी सुलझाई जाए

नेपाल मदरसा संघ की मांग, विम्स्टेक सम्मेलन में रोहिंग्या समस्या भी सुलझाई जाएनेपाल मदरसा संघ की मांग, विम्स्टेक सम्मेलन में रोहिंग्या समस्या भी सुलझाई जाए

मदरसा संघ ने कहा कि विम्स्टेक सम्मेलन में हो इस पर चर्चा, भारत से नेपाल आ सकते हैं रोहिंग्या, नेपाल पर बढ़ेगा भार

आईएन न्यूज(नेपाल डेस्क)

कृष्णा नगर (नेपाल): गुरुवार से शुरू होने जा रहे बिम्स्टेक सम्मेलन के पहले ही रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा भी गरमा गया है. सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत रोहिंग्या से प्रभावित म्यामांर और बांग्लादेश के प्रतिनिधि भी पहुंच रहे हैं. इसे देखते हुे नेपाल राष्ट्रीय मदरसा संघ ने आवाज उठाई है कि बिम्स्टेक सम्मेलन में रोहिंग्या समस्या पर भी चर्चा कर इसका हल निकाला जाए. मदरसा संघ के महासचिव मौलाना मशहूद खां नेपाली ने कहा कि यह अच्छा अवसर है. जब नेपाल में इस सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

राष्टीय मदरसा संघ के अध्यक्ष डा अब्दुल गनी अलकूफी ने कहा कि रोहिंग्या किसी एक देश की समस्या नहीं है. विम्स्टेक सम्मेलन में शरीक होने वाले सात देशों में से पांच देश इस समस्या से जूझ रहे हैं. डा. गनी ने कहा कि भारत, नेपाल की सीमा खुली होने के कारण पूरी संभावना है कि वे भारत से नेपाल में आ सकते हैं. नेपाल एक छोटा राष्ट है. अभी कुछ वर्ष पहले भूटानी शरणार्थी का भार इस नन्हें राष्ट ने झेला है. अब रोहिंग्या भी आ गए तो न केवल नेपाल की आवादी का भार बढ़ेगा, अनावश्यक रूप से रोजमर्रा के सामनों की किल्लते भी बढ़ेंगी.

संघ ने कहा कि रोहिंग्या समस्या से बांग्लादेश, भारत, म्यामार, नेपाल तथा थाईलैंड जैसे देश प्रभावित हैं. विम्स्टेक सम्मेलन में व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, जल विद्वुत संबंधित एजेंडा प्रमुख है. जबकि इन देशों की रोहिंग्या भी एक बड़ी समस्या है. इस पर भी विचार विमर्श की जरूरत है. डा गनी ने कहा कि हैरत है कि इस बड़ी समस्या को इस सम्मेलन में विचार विमर्श के लिए क्यों नहीं शामिल किया गया.

मौलाना मसहूद नेपाली ने कहा कि इस समस्या का समाधान तय किया जाना इस लिए भी जरूरी है कि आखिर वे भी इन्सान हैं. स्थाई निदान न होने के कारण उन्हें दरबदर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं. बलात, अपने देश से निकालने के लिए म्यामार में उनका कत्लेआम हुआ तो भारत उन्हें संदिग्ध की दृष्टि से देख रहा है.

मौलाना नेपाली ने कहा कि रोहिंग्या जब म्यामार में मारे जाने लगे तो वे वहां से भागने को मजबूर हुए. भागकर भारत सहित बांग्लादेश, थाईलैंड, नेपाल में शरण लेने को मजबूर हुए. कहा कि संयुक्त राष्टसंघ के उच्च आयोग के अनुसार नेपाल में सात सौ रोंिहग्या शरणार्थी के रूप में हैं. भारत में 40 हजार की संख्या में हैं. मौलाना नेपाली ने कहा कि भारत में रह रहे रोहिंग्या को खतरा बताते हुए उन्हें निकालने का आदेश है. चूंकि भारत नेपाल की सीमा पूरी तरह खुली हुई है. इसलिए इस बात की पूरी आशंका है कि भारत यदि रोहिंग्या को निकालने में सख्ती की तो वे खुली सीमा का लाभ उठाकर नेपाल की ओर रूख कर सकते है, जो नेपाल के लिए कत्तई ठीक नहीं होगा.

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