धान की पराली को लेकर ऊहापोह में हैं किसान व कंबाइन संचालक

धान की पराली को लेकर ऊहापोह में हैं किसान व कंबाइन संचालक

सरकार के फरमान से उलट है पराली को लेकर हो रही चर्चाएं

आई एन न्यूज महराजगंज डेस्क:
पराली जलाने से रोकने को लेकर जहां माननीय उच्चतम न्यायालय के पालन में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सख्त आदेश जारी कर कंबाइन मशीन में एसएमएस मशीन लगवाने को कहा गया है। वहीं मशीन न लगवा पाने की दशा में उसके कई विकल्प भी सुझाया गया है। तो वहीं क्षेत्र में पराली को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हो रही हैं। जो सरकार के फरमान के उलट है।
चर्चा है कि कंबाइन संचालकों को एसएमएस मशीन लगवाने से छूट मिल गया है। जिस कारण कंबाइन संचालक भी ऊहापोह में पड़ गए हैं। जबकि किसानों को पराली नष्ट न होने की दशा में अगली फसल की तैयारी को लेकर चिंता सताने लगी है।
दर्जनों किसानों ने बताया कि सरकार के एसएमएस मशीन लगवाने के फरमान के बाद अगली फसल की तैयारी आसान होने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन अब सरकार की ओर से विकल्प के साथ मशीन लगवाने से छूट मिलने से उन्हें दिक्कत होगी। उनका मानना है कि कंबाइन संचालक सरकार के फरमान के नाम पर मनमानी कटाई तो वसूल कर लेंगे। लेकिन उनके द्वारा विकल्प का प्रयोग नहीं करने की दशा में किसानों के साथ बेमानी होगी।
वहीं जानकारों का कहना है कि पराली जलाने से रोकने का आदेश माननीय उच्चतम न्यायालय का है। ऐसी दशा में माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करवाना सरकार का कार्य है। सरकार अपने मातहत अधिकारियों के माध्यम से न्यायालय के आदेश का पालन करवाती है। ऐसे में पराली जलाने से रोकना सरकार व उसके मातहतों की जिम्मेदारी है। अब सरकार के आदेश का पालन करना उसके हर नागरिक की दायित्व है। चाहे वह किसान हो या कंबाइन संचालक हो या कर्मचारी। ऐसी दशा में कंबाइन संचालकों को एसएमएस मशीन या उसका विकल्प अपनाना ही होगा।
जानकार यह भी कहते है कि कुछ कंबाइन संचालक अपनी रसूक व राजनीतिक पहुंच नाम पर स्थानीय प्रशासन व राजस्व टीम को गुमराह कर सकते है। लेकिन वह पराली की समस्या का स्थाई समाधान नहीं होगा।
( उत्तर प्रदेश)


Translate »