शासन के फरमान से बी आर डी मेडिकल कालेज पर काले बादल
शासन के फरमान से बी आर डी मेडिकल कालेज पर काले बादल
आई एन न्यूज गोरखपुर डेस्क । पूर्वी उत्तर प्रदेश , सीमावर्ती बिहार और नेपाल की तराई जिलों के मरीजों के लिए वरदान बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में तैनात चिकित्सकों द्वारा प्राइवेट प्रेक्टिस किए जाने की ख़ुफ़िया जाँच शुरू होते ही हड़कंप मच गया है। अब शासन के निर्णय से नाराज एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ चिकित्सक नौकरी से त्याग पत्र देने का तानाबाना बुनने लगे हैं। नतीजन कालेज एक नई मुसीबत में फंसता दिख रहा है।
इधर महानिदेशक, चिकित्सा एवं शिक्षा डा.वीएन त्रिपाठी हर हाल में शासन के निर्देश का शत-प्रतिशत पालन कराने को अडिग हैं। कहते हैं कि कॉलेज में तैनात रेग्यूलर डाक्टर किसी कीमत पर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता। इसके एवज में उसे नॉप प्रैक्टिसिंग एलाउंस मिलता है। ऐसे में यदि कोई डॉक्टर इस्तीफा देकर जाना चाहता है तो वह जा सकता है । उनकी जगह पर नए डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी।
खुलेआम प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं तीन दर्जन चिकित्सक
खबर है मिली है कि, मेडिसिन, पीडिया, आर्थो,जनरल सर्जरी, गायनो, ईएनटी और साईकेट्री के विशेषज्ञ डाक्टर सहित अन्य नौ सौ बेड वाले इस मेडिकल कालेज के ओपीडी में प्रतिदिन औसतन पांच हजार से ज्यादा मरीज देखते हैं।
चौकानें वाली बात यह है कि कॉलेज में तैनात तीन दर्जन से ज्यादा डाक्टर खुलेआम प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं। कोई अपने घर मरीज देखता है तो कोई किसी नर्सिंग होम में। मरीजों की भारी आमद के कारण अस्पताल के डॉक्टर खुल कर प्राइवेट प्रेक्टिस करते रहे हैं। कैंपस के करीब तीन दर्जन डॉक्टर इसमें संलिप्त हैं। कोई घर पर मरीज देखता है तो कोई प्राइवेट अस्पताल में । पीडिया, आर्थो, ईएनटी और गायनी के एक दर्जन डॉक्टरों के निजी अस्पताल हैं। कालेज के कुछ डॉक्टरों की क्लीनिक बेतियाहाता में चलती है।
निजी अस्पतालों से एनेस्थिसिया के डॉक्टर भी जुड़े हैं
बताया जाता है कालेज के बाहर संचालित एक अस्पताल और एक पैथोलॉजी लैब के मालिक बीआरडी के डॉक्टर ही है। गोरखनाथ, चरगांवा और करीम नगर में कुछ निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं। पादरी बाजार में एक अस्पताल में आर्थो एवं जनरल सर्जरी के डॉक्टर मरीजों का इलाज व ऑपरेशन करते हैं। निजी अस्पतालों से एनेस्थिसिया के डॉक्टर भी जुड़े हैं।
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी
माना जाता है कि मेडिसिन विभाग में तैनात रहे न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पवन सिंह ने इसी के चलते इस्तीफा दिया। हालांकि उन्होंने इस्तीफा देने का कारण निजी बताया। न्यूरोसर्जरी विभाग में एक मात्र डॉ. विजय शंकर मौर्या ने भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है।
कालेज में दो दर्जन से अधिक डॉक्टर संविदा के जरिए जुड़े हैं। इसमें डॉक्टरों को कॉलेज की ड्यूटी के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस करने की छूट मिलती है।
डॉक्टरों का इस्तीफा नई मुसीबत बन सकती है
चर्म रोग और रेडियोलॉजी विभाग में तो सभी डॉक्टर संविदा पर ही है। विभाग में कोई रेग्यूलर डॉक्टर ही नहीं है। बीआरडी में पिछले शैक्षिक सत्र में ही एमबीबीएस की सीटें 50 से बढ़कर 100 हुई। सीटों के बढ़ने के कारण कालेज में शिक्षकों की जरूरत बढ़ गई । कॉलेज प्रशासन ने पांच प्रोफेसर समेत 17 शिक्षकों की मांग शासन से की है।





