​सोनौली में ड्रग्स बरामदगी: पांच दिन और सन्नाटा! आखिर किस बड़े नाम को बचा रही है पुलिस?

​सोनौली में ड्रग्स बरामदगी: पांच दिन और सन्नाटा! आखिर किस बड़े नाम को बचा रही है पुलिस?
आई एन न्यूज सोनौली डेस्क:
भारत-नेपाल के सोनौली बॉर्डर पर 25 अक्टूबर को एसएसबी और पुलिस की संयुक्त टीम ने हरियाणा नंबर की स्विफ्ट डिजायर कार (HR72D6317) से नशीली दवाओं की बड़ी खेप बरामद की। कार्रवाई के दौरान चालक प्रेमचंद पुत्र संतराम, निवासी सोनौली जुगौली, को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
हालांकि, पांच दिन बाद भी कार के वास्तविक स्वामी का नाम सामने नहीं आया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि जांच केवल चालक तक सीमित है या वाहन मालिक और पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
हरियाणा नंबर की कार सोनौली जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र तक कैसे पहुंची? वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है और चालक प्रेमचंद के पास कैसे आया? इन सवालों का जवाब सामने आना बेहद जरूरी है।
1503 पीस प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद होने के पांच दिन बाद भी वाहन स्वामी की पहचान स्पष्ट नहीं होने पर पुलिस की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
क्या पंजीकरण दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है? क्या कार किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर है? पुलिस की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से चर्चाओं को बल मिल रहा है।
सूत्रों की माने तो सीमावर्ती क्षेत्र में चर्चा है कि कार सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किसी अधिकारी या कर्मचारी की हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे की सच्चाई वाहन के दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस मामले की विवेचना कर रहे भगवानपुर चौकी प्रभारी से कार स्वामी की पहचान को लेकर जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। संभव है कि जांच प्रभावित होने की आशंका से पुलिस फिलहाल विवरण साझा नहीं कर रही हो, लेकिन उचित समय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जरूरी है।
इस बरामदगी पर कई प्रमुख सवाल खडे हो रहे है।
स्विफ्ट डिजायर HR72D6317 का पंजीकृत स्वामी कौन है?
चालक प्रेमचंद को कार किसने दी थी?
क्या पुलिस ने वाहन के पंजीकरण रिकॉर्ड की जांच की है?
क्या कार मालिक और अन्य संभावित सहयोगियों की भी जांच हो रही है?
सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति की कार होने की चर्चा में कोई तथ्य है?
पूरी सच्चाई सामने आना जरूरी है।
अब देखना है कि पुलिस कार मालिक की पहचान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर कब तक स्थिति स्पष्ट करती है।
महाराजगंज —उत्तर प्रदेश।


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