नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।

नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।

नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।
आई एन न्यूज गोरखपुर डेस्क:
सूर्योपासना का महापर्व सूर्यषष्ठी व्रत (छठ) की तैयारी पूरी हो गई है। सोमवार की सुबह महिलाएं नहाय-खाय के बाद व्रत शुरू कर दी। 14 नवम्बर की सुबह उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी।
छठ पूजा के सम्बंध में गया कि यह चार दिवसीय पर्व है। सूर्यषष्ठी वर्ष में दो बार किया जाता है। एक चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में। चैत्र शुक्ल षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ को चैत्री छठ एवं कार्तिक शुक्ल पक्ष पर मनाए जाने वाले छठ को कार्तिक छठ पर्व कहते हैं। कार्तिक छठ ही ज्यादा प्रचलन में है। इस वर्ष छठ पूजा का प्रारम्भ 11 नवम्बर दिन रविवार को नहाय-खाय से होगा। 12 नवम्बर दिन सोमवार को खरना और 13 नवम्बर दिन मंगलवार को सांध्यकालीन अर्घ्य तथा 14 नवम्बर दिन बुधवार को सूर्योदय कालीन अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ पूजा का समय ———-
चार दिवसीय छठ पूजा के पहले दिन 11 नवम्बर दिन रविवार को सूर्योदय प्रात: 6:34 बजे और चतुर्थी तिथि रात्रि 11:16 बजे तक है। इस दिन मूल नक्षत्र सुकर्मा और सिद्धि नामक योग है। चंद्रमा अपने परम मित्र बृहस्पति की राशि पर स्थित है। इस दिन व्रती महिला जलाशय में स्नान करके घर की सफाई कर कद्दू की सब्जी बनाएगी। सबको भोजन देकर स्वयं संकल्पबद्ध होकर उपवास करेगी और रात्रि को भूमि पर या लकड़ी के आसर पर सोएंगी। सूर्यषष्ठी व्रत के दूसरे दिन 12 नवम्बर दिन सोमवार को सूर्योदय प्रात: 6:34 बजे और पंचमी तिथि रात्रि 12:55 बजे तक है। पूर्वाषाढ़ नक्षत्र और धृति योग है। इस दिन व्रती महिला जलाशय के तट या घाट पर जाकर षष्ठी माता की मिट्टी की वेदी का निर्माण कर सूर्यदेव तथा माता षष्ठी की पूजा कर चतुर्थी में किया गया उपवास खोलेंगी। तीसरे दिन 13 नवम्बर दिन मंगलवार को सूर्योदय प्रात: 6:35 बजे तथा षष्ठी तिथि का मान रात्रि 2:54 बजे तक है। उत्तराषाढ़ नक्षत्र तथा मानस योग है। सायंकाल व्रती महिलाएं सूर्यास्त के समय 5:25 बजे सूर्यदेव को प्रथम अर्घ्य देंगी। चौथे तथा अंतिम दिन 14 नवम्बर दिन बुधवार को सूर्योदय प्रात: 6:36 बजे है। इसी समय सूर्यदेव को द्वितीय अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ पूजा की विशेषता
छठ पूजा का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पक्ष इसकी सादगी, पवित्रता, भक्ति एवं आध्यात्म है। इसकी उपासना पद्धति सरल है। इसमें किसी आचार्य की आवश्यकता नहीं है। यह लौकिक रीति-रिवाज एवं ग्रामीण जीवन पर आधारित है।
श्रीराम व द्रौपदी ने भी किया था छठ व्रत ——
बताया गया कि श्रीराम ने राज्याभिषेक के बाद सीता के साथ यह व्रत किया था। द्रौपदी ने अज्ञातवास के दौरान राजपाट की पुन: प्राप्ति की मनोकामना के संकल्प से यह व्रत किया था।
स्त्री-पुरुष दोनों करते हैं छठ व्रत
हिन्दू धर्म के अधिकतर व्रत-त्योहार महिलाएं ही करती हैं लेकिन छठ व्रत एक ऐसा व्रत है जिसे महिलाओं के साथ ही पुरुष भी करते हैं। राजेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव ‘राजन’ ने बताया कि पुरुषों द्वारा छठ व्रत करने की एक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार पुरुष महाभारत काल से छठ व्रत करते आ रहे हैं। (उत्तर प्रदेश)नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ छठ महाव्रत।

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