फर्जी पत्रकारों से पटे सीमाई बाज़ार, सुरक्षा में सेंध
फर्जी पत्रकारों से पटे सीमाई बाज़ार, सुरक्षा में सेंध
-पत्रकार बन सोनौली सीमा तक पहुंच गये थे पाकिस्तानी
आईएन न्यूज,सोनौली,महराजगंजः
भारत-नेपाल की संवेदनशील सीमा सोनौली व उसके आसपास के सीमाई कस्बों में अपने आप को तथाकथित पत्रकार कह पुलिस, कस्टम व एसएसबी कार्यालयों पर कुर्सी खोजने वाले लोगों की संख्या अधिक होती जा रही है। जबकि इनमें से बहुतेरे ऐसे हैं, जिनका किसी भी तरह की पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है।
कुछ इसी तरह का ट्रेंड़ अपनाते हुये कुछ दिन पूर्व ही सोनौली सीमा पर कुछ पाकिस्तानी नागरिक भी आ गये। पत्रकारिता के नाम पर नेपाल के बेलहिया पुलिस से ख़ातिरदारी कराई, और फिर सोनौली सीमा तथा उससे सटे एसएसबी कैंप का फोटो बनाने लगे। एसएसबी की आपत्ति के बाद नेपाल पुलिस ने तथाकथित पाक पत्रकारों को हिरासत में लिया,पूछताछ की, फिर उन्हें वापस नेपाल भेज़ दिया। मगर वह अपने कैमरे में क्या कैद किये और किस उद्देश्य से किये, इसकी जानकारी न तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पता चल सकीं ना ही नेपाल के किसी विभाग को।
अब सीमावर्ती क्षेत्र के पत्रकारिता पर नज़र ड़ाले तो, यहां किसी भी तरह की पत्रकारिता यह नहीं कहती कि वह आये दिन सोनौली सीमा का फोटो या विडियो बनाये, घंटों तक एसएसबी कैंप के पास या कार्यालयों के पास मंड़राये, कस्टम या फिर पुलिस थानों पर जाकर चाय पानी करें। मगर यह नज़ारा सीमाई इलाकों में एक प्रथा सी बन गयी है।
एक हद तक ये माना जा सकता है कि कुछ ऐसे होंगे जो विभागों की मुख़बिरी या फिर दलाली के लिये इस पत्रकारिता का चोला ओढ़े हों। जिनका कि किसी भी मुद्दे या सरोकार पर लिख़ने-पढ़ने से कोई मतलब नहीं है। विभाग भी अपने दांये-बांये की कमाई के लिये इस टाइप के तथाकथित पत्रकारों को तहरीज़ देकर अपना ऊल्लू सीधा कर लेते हैं।
रोटी-बेटी रिश्ता, तस्करी, नशा कारोबार, आतंकी घुसपैठ, हथियार तस्करी, विदेशी विषयक नियम कानून, पर्यटन व व्यापार जैसे महत्वपूर्ण मसलों से परिपूर्ण नेपाल-भारत सीमा पर पत्रकारिता निश्चित रुप से एक महत्वपूर्ण व जिम्मेवारी भरा कार्य है।
ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारिता की परिभाषा से अंजान लोगों का भी सीमाई इलाके में तेजी से इज़ाफा होना और सीमा तथा एसएसबी कैंपो तक पहुंच फोटो खींचना “सुरक्षा में सेंध” के समान है।





